विन न्यूज़ नेटवर्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अलग-अलग मौकों पर भेंट किए गए स्मृति चिह्नों की ई-नीलामी का आठवां संस्करण 17 सितंबर 2026 से शुरू हो गया है। संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित इस नीलामी में कुल 1,498 मेमेंटोज को बोली के लिए उपलब्ध कराया गया। इन वस्तुओं में देश की कला, संस्कृति, हस्तशिल्प, आध्यात्मिक परंपराओं और खेल उपलब्धियों की झलक है। नीलामी से प्राप्त राशि ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम के लिए दी जाएगी।
एनजीएमए में प्रदर्शनी, बोली से पहले देख सकेंगे उपहार
ई-नीलामी में शामिल स्मृति चिह्नों को आम लोगों के लिए राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा यानी एनजीएमए, नई दिल्ली में प्रदर्शित किया गया है। इससे लोग नीलामी में भाग लेने से पहले इन वस्तुओं को करीब से देख सकेंगे। संस्कृति मंत्रालय के मुताबिक, इस संग्रह में देश के अलग-अलग हिस्सों की पारंपरिक कला और शिल्पकला को स्थान दिया गया है। पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, असम, बिहार और ओडिशा समेत कई राज्यों की सांस्कृतिक विविधता इन मेमेंटोज में नजर आती है।
50 खास वस्तुओं को बनाया गया ‘हीरो ऑब्जेक्ट’
इस बार नीलामी में शामिल 1,498 वस्तुओं में से 50 प्रमुख स्मृति चिह्नों को ‘हीरो ऑब्जेक्ट’ के तौर पर चुना गया है। इनमें कर्नाटक से प्राप्त भगवान राम की चांदी की प्रतिमा सबसे अधिक शुरुआती कीमत वाली वस्तुओं में शामिल है, जिसका आधार मूल्य 13.50 लाख रुपये रखा गया है। इसके बाद काकतीय कला तोरणम की चांदी की प्रतिकृति का आधार मूल्य 9 लाख रुपये है। गोंड कला की ‘ट्री ऑफ लाइफ’ पेंटिंग 7.50 लाख रुपये, रथ पर सवार जगन्नाथ परिवार की प्रतिमा 6 लाख रुपये और 99.99 प्रतिशत शुद्ध सोने की परत वाली राधा-कृष्ण कलाकृति का आधार मूल्य 5.40 लाख रुपये है।
नीलामी की राशि से गंगा संरक्षण को मिलेगा सहयोग
पीएम मेमेंटोज ई-नीलामी का उद्देश्य केवल इन स्मृति चिह्नों को सार्वजनिक बोली के माध्यम से उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि इससे प्राप्त धनराशि को राष्ट्रीय स्तर के एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम से जोड़ना भी है। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, नीलामी से मिलने वाली राशि ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम में जाएगी। इस पहल के जरिए सांस्कृतिक विरासत और गंगा संरक्षण के प्रयासों को एक साथ जोड़ा गया है।
2019 से जारी है नीलामी की परंपरा
प्रधानमंत्री को मिले उपहारों की नीलामी की यह श्रृंखला 2019 में शुरू हुई थी। केंद्र सरकार के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2021 से 2025 तक आयोजित सात संस्करणों से कुल करीब 52.19 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई। इनमें 2023 के दो संस्करणों में क्रमशः 15.8 करोड़ और 14.4 करोड़ रुपये की राशि मिली थी।
इस पूरी पहल के जरिए प्रधानमंत्री को मिले स्मृति चिह्नों को आम लोगों और संग्रहकर्ताओं के लिए उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनसे प्राप्त धनराशि को गंगा संरक्षण से जुड़े कार्यों में लगाने की व्यवस्था की गई है। आठवें संस्करण में भी नागरिक, संग्रहकर्ता, संस्थान और कला-संस्कृति में रुचि रखने वाले लोग हिस्सा ले सकते हैं।