विन न्यूज़ नेटवर्क। बच्चों के बेहतर शारीरिक विकास के लिए कैल्शियम सबसे जरूरी पोषक तत्वों में से एक माना जाता है। यह हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने के साथ-साथ मांसपेशियों और शरीर की कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन कई माता-पिता की सबसे बड़ी चिंता तब बढ़ जाती है, जब उनका बच्चा दूध पीने से मना कर देता है।
अक्सर ऐसा माना जाता है कि दूध नहीं पीने से बच्चे में कैल्शियम की कमी हो जाएगी, जबकि ऐसा जरूरी नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बच्चे की डाइट संतुलित है तो दूध के अलावा भी कई ऐसे खाद्य पदार्थ हैं, जो कैल्शियम की जरूरत पूरी करने में मदद कर सकते हैं।
दही और पनीर बन सकते हैं बेहतरीन विकल्प
अगर बच्चा दूध पसंद नहीं करता, तो उसे दही और पनीर खिलाया जा सकता है। कई बच्चों को दूध की तुलना में दही और पनीर का स्वाद अधिक पसंद आता है। ये दोनों कैल्शियम के अच्छे स्रोत माने जाते हैं और शरीर को आवश्यक पोषण भी प्रदान करते हैं। इन्हें नियमित भोजन का हिस्सा बनाकर बच्चे की कैल्शियम की जरूरत काफी हद तक पूरी की जा सकती है।
हरी पत्तेदार सब्जियां भी हैं पोषण का खजाना
पालक, मेथी, बथुआ और अन्य हरी पत्तेदार सब्जियों में भी कैल्शियम अच्छी मात्रा में पाया जाता है। यदि बच्चा सब्जियां सीधे नहीं खाता, तो इन्हें पराठे, सूप, चीला या अन्य पसंदीदा व्यंजनों में मिलाकर दिया जा सकता है। इससे बच्चे को जरूरी पोषक तत्व आसानी से मिल जाते हैं।
रागी, टोफू और ड्राई फ्रूट्स करें डाइट में शामिल
रागी को कैल्शियम का बेहतरीन प्राकृतिक स्रोत माना जाता है। रागी का दलिया, डोसा, चीला या अन्य व्यंजन बच्चों के लिए पौष्टिक विकल्प हो सकते हैं। इसके अलावा टोफू, बादाम और चिया सीड्स भी कैल्शियम से भरपूर होते हैं। छोटे बच्चों के लिए बादाम या अन्य सूखे मेवों को पीसकर या बारीक काटकर देना बेहतर रहता है, ताकि गले में फंसने का खतरा न रहे।
विटामिन D के बिना अधूरा है कैल्शियम
सिर्फ कैल्शियम युक्त भोजन देना ही पर्याप्त नहीं होता। शरीर कैल्शियम का सही उपयोग तभी कर पाता है, जब पर्याप्त मात्रा में विटामिन D भी मिले। इसके लिए बच्चों को रोजाना कुछ समय सुबह की हल्की धूप में खेलने देना चाहिए। धूप विटामिन D का प्राकृतिक स्रोत मानी जाती है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करती है।
इन संकेतों को नजरअंदाज न करें
यदि बच्चा लंबे समय से दूध नहीं पी रहा है, खाने में भी रुचि नहीं लेता, उसका वजन या लंबाई सामान्य गति से नहीं बढ़ रही है या डॉक्टर को कैल्शियम की कमी की आशंका है, तो बिना चिकित्सकीय सलाह के कोई कैल्शियम सप्लीमेंट नहीं देना चाहिए। ऐसी स्थिति में बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना सबसे सुरक्षित विकल्प होता है।
संतुलित आहार है सबसे बड़ा समाधान
दूध न पीने का मतलब यह नहीं कि बच्चे में कैल्शियम की कमी निश्चित रूप से हो जाएगी। यदि उसकी थाली में दही, पनीर, रागी, हरी सब्जियां, टोफू और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल हैं, तो उसे पर्याप्त कैल्शियम मिल सकता है। साथ ही बच्चों को ताजा और घर का बना भोजन देना तथा जंक फूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाना भी उनके संपूर्ण विकास के लिए जरूरी माना जाता है।