विन न्यूज़ नेटवर्क। देश में NEET-2026 परीक्षा विवाद और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के कामकाज को लेकर लंबे समय से जारी राजनीतिक और छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार करने के बाद यह जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को सौंपी।
सरकार के इस फैसले को शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने और परीक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक क्षमता के चलते प्रह्लाद जोशी को यह अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। अब उनके सामने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को प्रभावी ढंग से लागू करने के साथ-साथ परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्रों का विश्वास बहाल करने जैसी बड़ी चुनौतियां होंगी।
NEET विवाद के बाद हुआ बड़ा बदलाव
NEET-2026 परीक्षा को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। परीक्षा प्रक्रिया और NTA के प्रबंधन पर लगातार सवाल उठते रहे। इसी बीच विपक्ष ने भी केंद्र सरकार को घेरा। बढ़ते विवाद के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देते समय उन्होंने कहा कि वह पिछले चार दशकों से शिक्षा और छात्रों के हित में काम करते रहे हैं और आगे भी देश के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए समर्पित रहेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों ने छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की, जिससे उन्हें व्यक्तिगत रूप से काफी पीड़ा हुई। इसके बावजूद उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में सरकार के प्रयास जारी रहने का भरोसा जताया।
36 दिन बाद खत्म हुआ CJP का आंदोलन
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने NEET विवाद को लेकर पिछले 36 दिनों से चल रहा अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की। संगठन का दावा है कि सरकार ने उसकी कई प्रमुख मांगों पर सहमति जताई है। इनमें परीक्षा प्रणाली में सुधार, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों की वापसी और कथित तौर पर प्रभावित अभ्यर्थियों के परिवारों को सहायता देने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
CJP ने कहा कि सरकार और संगठन के बीच चार सप्ताह बाद फिर बैठक होगी, जिसमें परीक्षा सुधारों को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।
कौन हैं प्रह्लाद जोशी?
प्रह्लाद जोशी का जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुरा (पूर्व में बीजापुर) में हुआ था। साधारण परिवार से आने वाले जोशी के पिता भारतीय रेलवे में कार्यरत थे। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रेलवे स्कूल से प्राप्त की और आगे की पढ़ाई हुबली के न्यू इंग्लिश स्कूल में पूरी की।
उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने हुबली स्थित के.एस. आर्ट्स कॉलेज से बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री हासिल की। यह कॉलेज कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ से संबद्ध है। छात्र जीवन से ही सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहे प्रह्लाद जोशी बाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े और यहीं से उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई।
लगातार पांच बार बने लोकसभा सांसद
प्रह्लाद जोशी ने वर्ष 2004 में पहली बार कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया। इसके बाद उन्होंने लगातार पांच बार इसी सीट से जीत दर्ज की। भाजपा संगठन में उन्हें कर्नाटक के सबसे अनुभवी नेताओं में गिना जाता है।
अपने लंबे राजनीतिक करियर में उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। वे भाजपा कर्नाटक इकाई के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा संसदीय कार्य मंत्री, कोयला मंत्री, खान मंत्री, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
शिक्षा मंत्रालय में क्या होंगी प्राथमिकताएं?
शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद प्रह्लाद जोशी ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करेंगे। उनका लक्ष्य शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और भरोसेमंद बनाना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि उनके सामने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रभावी तरीके से लागू करना, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देना, उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता सुधारना और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सबसे बड़ी प्राथमिकताएं होंगी। साथ ही NTA की कार्यप्रणाली को मजबूत बनाना और भविष्य में परीक्षा संबंधी विवादों को रोकना भी उनकी जिम्मेदारी का अहम हिस्सा रहेगा।