विन न्यूज़ नेटवर्क। बच्चे के जन्म के बाद उसके पोषण की सबसे अहम जिम्मेदारी मां के दूध से पूरी होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म से लेकर पहले छह महीने तक शिशु को केवल मां का दूध ही दिया जाना चाहिए। यदि किसी कारणवश मां का दूध उपलब्ध नहीं हो पाता, तो डॉक्टर की सलाह पर ही विकल्प अपनाना चाहिए।
हालांकि, जब बच्चा एक साल का हो जाता है और पहली बार उसे जानवर का दूध देने की बारी आती है, तब अधिकांश माता-पिता के मन में एक सामान्य सवाल उठता है- क्या बच्चे के लिए गाय का दूध बेहतर है या भैंस का? विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले में जल्दबाजी करने के बजाय बच्चे की उम्र, पाचन क्षमता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है।
गाय का दूध क्यों माना जाता है बेहतर विकल्प?
बाल स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एक साल की उम्र के बाद बच्चों के लिए गाय का दूध अपेक्षाकृत बेहतर माना जाता है।
गाय के दूध में फैट की मात्रा भैंस के दूध की तुलना में कम होती है, जिससे यह हल्का और आसानी से पचने वाला होता है। छोटे बच्चों का पाचन तंत्र अभी पूरी तरह विकसित नहीं होता, इसलिए हल्का दूध उनके लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है।
इसके अलावा गाय के दूध में कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन बी12 और अन्य आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो हड्डियों, दांतों और शारीरिक विकास में मदद करते हैं।
भैंस का दूध कब दिया जा सकता है?
भैंस के दूध में फैट और कैलोरी की मात्रा अधिक होती है। यही कारण है कि यह अधिक गाढ़ा और भारी माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों को भैंस का दूध पचाने में कुछ कठिनाई हो सकती है। इसलिए अधिकांश डॉक्टर शुरुआत गाय के दूध से करने की सलाह देते हैं।
हालांकि हर बच्चे की शारीरिक जरूरत अलग होती है। यदि किसी बच्चे को विशेष पोषण की आवश्यकता हो या डॉक्टर उचित समझें, तो उनकी सलाह के अनुसार भैंस का दूध भी दिया जा सकता है।
पहली बार दूध देते समय इन बातों का रखें ध्यान
जब भी बच्चे को पहली बार जानवर का दूध दें, तो एक साथ अधिक मात्रा देने से बचें।
शुरुआत थोड़ी मात्रा से करें और अगले कुछ घंटों तक बच्चे की प्रतिक्रिया पर ध्यान दें। यदि दूध पीने के बाद बच्चे को उल्टी, दस्त, पेट दर्द, गैस, त्वचा पर लाल चकत्ते या किसी प्रकार की एलर्जी दिखाई दे, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।
इसके अलावा दूध हमेशा अच्छी तरह उबला हुआ और साफ-सुथरा होना चाहिए।
सिर्फ दूध नहीं, संतुलित आहार भी है जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि एक साल की उम्र के बाद केवल दूध पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होता।
बढ़ते बच्चे को संतुलित आहार की आवश्यकता होती है, जिसमें फल, हरी सब्जियां, दालें, अनाज, दही, अंडा (यदि परिवार में सेवन किया जाता हो) और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल होने चाहिए।
संतुलित भोजन बच्चे के शारीरिक विकास के साथ-साथ मानसिक और बौद्धिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
डॉक्टर की सलाह क्यों है सबसे जरूरी?
यदि आपका बच्चा अभी एक वर्ष से छोटा है, तो बिना डॉक्टर की सलाह के उसे गाय या भैंस का दूध नहीं देना चाहिए।
वहीं एक साल की उम्र पूरी होने के बाद भी दूध का चुनाव बच्चे की सेहत, वजन, पाचन क्षमता और पोषण संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए।
हर बच्चा अलग होता है, इसलिए किसी दूसरे बच्चे की डाइट देखकर फैसला लेने के बजाय बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे सुरक्षित और सही विकल्प माना जाता है।
बच्चे की अच्छी सेहत का पहला कदम सही पोषण
विशेषज्ञों का मानना है कि सही समय पर सही प्रकार का दूध और संतुलित आहार बच्चे के स्वस्थ विकास की मजबूत नींव रखते हैं। इसलिए माता-पिता को जल्दबाजी या घरेलू मान्यताओं के बजाय वैज्ञानिक सलाह और डॉक्टर के मार्गदर्शन के अनुसार ही बच्चे के भोजन से जुड़े निर्णय लेने चाहिए। स्वस्थ बचपन ही बेहतर भविष्य की सबसे मजबूत शुरुआत है।