उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को लेकर चल रहे विवाद पर समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद रुचि वीरा ने सरकार से पुनर्विचार करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आजम खान ने इस विश्वविद्यालय की स्थापना क्षेत्र के लोगों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की थी। उनके अनुसार किसी भी शैक्षणिक संस्थान का निर्माण करना बेहद कठिन होता है, जबकि उसे समाप्त करना आसान है। उन्होंने कहा कि यदि विश्वविद्यालय में कोई अनियमितता या कमी है तो उसे कानून और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार दूर किया जा सकता है, लेकिन किसी शिक्षा संस्थान को खत्म करना उचित नहीं होगा।
‘जौहर यूनिवर्सिटी राष्ट्र की संपत्ति है’
रुचि वीरा ने कहा कि मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय केवल किसी एक समुदाय का संस्थान नहीं है, बल्कि यहां सभी धर्मों और वर्गों के छात्र-छात्राएं शिक्षा प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग समुदायों के शिक्षक और कर्मचारी भी यहां कार्यरत हैं। ऐसे में इस संस्थान को राजनीतिक दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे राष्ट्र की संपत्ति मानते हुए शिक्षा और विद्यार्थियों के भविष्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
हनुमानगढ़ी विवाद पर भी दी प्रतिक्रिया
हनुमानगढ़ी से जुड़े विवाद पर सपा सांसद ने कहा कि धर्म और जाति के मुद्दों के जरिए जनता का ध्यान विकास और जनहित के वास्तविक मुद्दों से भटकाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब संबंधित पक्ष स्वयं यह स्वीकार कर चुका है कि वहां कभी नमाज नहीं पढ़ी गई, तो ऐसे मामलों को अनावश्यक रूप से तूल देने के बजाय रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास जैसे विषयों पर चर्चा होनी चाहिए।
अखिलेश और राहुल के विदेश दौरों का किया बचाव
अखिलेश यादव और राहुल गांधी के विदेश दौरों पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए रुचि वीरा ने कहा कि विदेश यात्राओं से नई तकनीक, आधुनिक विकास मॉडल और बेहतर व्यवस्थाओं को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने दावा किया कि अखिलेश यादव ने अपने कार्यकाल में एक्सप्रेस-वे, मेट्रो जैसी आधुनिक परियोजनाओं और छात्रों के लिए टैबलेट व स्मार्टफोन जैसी योजनाओं के माध्यम से इसी सोच को लागू करने का प्रयास किया।
रोजगार और पेपर लीक पर सरकार को घेरा
सपा सांसद ने प्रदेश और देश में बढ़ती बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक और युवाओं की समस्याओं को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं, जिससे युवाओं में निराशा बढ़ रही है। रुचि वीरा ने कहा कि सरकार को धार्मिक और राजनीतिक विवादों के बजाय शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों पर अधिक ध्यान देना चाहिए।