विन न्यूज़ नेटवर्क। उत्तराखंड के रुड़की क्षेत्र में पंचायत चुनाव से जुड़ा एक बहुचर्चित मामला आखिरकार निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया। भगवानपुर ब्लॉक की खेलपुर नसरुल्लापुर ग्राम पंचायत की प्रधान नीलम देवी को जिला प्रशासन ने पद से हटा दिया है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद अंतिम आदेश जारी करते हुए प्रधान पद रिक्त घोषित कर दिया।
यह मामला पिछले करीब साढ़े तीन वर्षों से प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ था।
2023 की शिकायत से शुरू हुई थी कार्रवाई
विवाद की शुरुआत गांव खेलपुर निवासी अनिल कुमार द्वारा की गई शिकायत से हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि वर्ष 2022 के पंचायत चुनाव में नीलम देवी ने नामांकन पत्र के साथ कथित रूप से फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था और उसी आधार पर चुनाव लड़ा था।
शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने संबंधित शैक्षिक दस्तावेजों की जांच कराई। शिक्षा विभाग की रिपोर्ट में प्रमाणपत्र को संदिग्ध और असत्य पाया गया, जिसके बाद कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
एसडीएम ने घोषित किया था अयोग्य
जांच रिपोर्ट और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर एसडीएम भगवानपुर ने नीलम देवी को प्रधान पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। इसके खिलाफ उन्होंने हरिद्वार के मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) के समक्ष अपील दायर की, लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली और एसडीएम का आदेश बरकरार रखा गया।
हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
सीडीओ के फैसले के बाद नीलम देवी ने उत्तराखंड हाईकोर्ट का रुख किया। शुरुआत में अदालत से उन्हें अंतरिम राहत मिल गई थी, जिसके कारण प्रशासनिक कार्रवाई पर रोक लग गई थी।
हालांकि, 30 जून 2026 को हाईकोर्ट ने अपने पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया। अदालत से स्थायी राहत नहीं मिलने के बाद जिला प्रशासन ने लंबित कार्रवाई पूरी कर दी।
डीएम ने जारी किया अंतिम आदेश
हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने मामले की पूरी पत्रावली का परीक्षण किया और नीलम देवी को तत्काल प्रभाव से प्रधान पद से हटाने का आदेश जारी कर दिया। प्रशासनिक आदेश जारी होते ही खेलपुर नसरुल्लापुर ग्राम पंचायत में प्रधान का पद रिक्त हो गया।
अब आगे क्या होगा?
प्रधान पद खाली होने के बाद पंचायत में आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू की जाएगी। नियमानुसार कार्यवाहक व्यवस्था और आगामी चुनाव संबंधी प्रक्रिया पर निर्णय लिया जाएगा।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार पंचायत के नियमित कार्य प्रभावित न हों, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
जिले के चर्चित मामलों में शामिल
रुड़की और हरिद्वार जिले में यह मामला लंबे समय तक चर्चा में रहा। पंचायत प्रतिनिधियों की पात्रता, शैक्षिक प्रमाणपत्रों की सत्यता और चुनावी दस्तावेजों की जांच को लेकर इस प्रकरण को एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पंचायत चुनावों में प्रस्तुत दस्तावेजों की प्रामाणिकता को लेकर प्रशासन अब पहले से अधिक सतर्क हो गया है और भविष्य में ऐसे मामलों में जांच और भी सख्त हो सकती है।