अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव अब और गंभीर होता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के बीच हुए ताजा हमलों ने पूरे मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ा दिया है। इस संघर्ष का असर सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक तेल बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, 13 जुलाई की रात अमेरिकी सेना ने लगभग पांच घंटे तक ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर अभियान चलाया। इस दौरान बुशेहर, चाबहार, जास्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास समेत कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन ठिकानों और नौसैनिक क्षमताओं को कमजोर करना था। साथ ही, अमेरिका ने बताया कि मध्य-पूर्व में उसके 50 हजार से अधिक सैनिक हाई अलर्ट पर तैनात हैं।
दूसरी ओर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई का दावा करते हुए कहा कि उसने बहरीन स्थित अल-जुफैर में अमेरिकी सैन्य अड्डे के हथियार भंडार, सैटेलाइट संचार केंद्र और सैनिकों से जुड़े एक भवन को निशाना बनाया। ईरान ने यह भी दावा किया कि उसने अमेरिका के MQ-1 ड्रोन को मार गिराया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
इस सैन्य टकराव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी देखने को मिला है। ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर लगभग 85 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड करीब 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और ईंधन की कीमतों पर इसका और बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।
बताया जा रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच पहले शांति समझौते की दिशा में सहमति बनी थी, लेकिन होर्मुज क्षेत्र में दो जहाजों पर हमले के बाद हालात फिर बिगड़ गए। इसके बाद अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई की, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। मौजूदा हालात को देखते हुए पूरी दुनिया की नजरें अब इस संघर्ष के अगले घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।