तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। सत्तारूढ़ तमिलगा वेट्री कझगम के विधायक एन. इलैयाराजा ने आरोप लगाया है कि उन्हें पार्टी छोड़ने के लिए 35 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया गया। उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने पूर्व डीएमके मंत्री वी. सेंथिल बालाजी के भाई अशोक कुमार के खिलाफ मामला दर्ज किया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
विधायक ने लगाए पार्टी बदलने के लिए दबाव और लालच के आरोप
शिकायत के अनुसार, विधायक एन. इलैयाराजा का कहना है कि उनसे कई बार संपर्क कर सत्तारूढ़ गठबंधन छोड़ने का दबाव बनाया गया। आरोप है कि पार्टी बदलने के बदले उन्हें 35 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव रखा गया। विधायक ने यह भी दावा किया कि उन्हें कथित तौर पर धमकियां भी दी गईं, जिसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के बाद अशोक कुमार के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
विधायक की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए तमिलनाडु पुलिस ने अशोक कुमार के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जांच के दौरान मिले बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर केस दर्ज किया गया है। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़ी धाराएं भी शामिल की गई हैं।
गिरफ्तार आरोपी ने पूछताछ में किए अहम खुलासे
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस मामले में पहले गिरफ्तार किए गए एक आरोपी नरेश ने पूछताछ के दौरान दावा किया कि उसने विधायक एन. इलैयाराजा से संपर्क करने से पहले चेन्नई में अशोक कुमार से मुलाकात की थी। पूछताछ में उसने यह भी कथित तौर पर कहा कि उसने अशोक कुमार और वी. सेंथिल बालाजी के निर्देश पर विधायक से संपर्क किया था। हालांकि इन दावों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
सरकार गिराने की साजिश की भी जांच
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल पार्टी बदलवाने तक सीमित नहीं हो सकता। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या इसके पीछे सरकार को अस्थिर करने या गिराने की कोई साजिश थी। इसी सिलसिले में चेन्नई पुलिस पहले ही पांच लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। उन पर टीवीके विधायक को पाला बदलने के लिए कथित तौर पर मनाने और राजनीतिक साजिश रचने का आरोप है।
राजनीतिक माहौल पहले से ही था गर्म
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब राज्य की राजनीति पहले से ही काफी संवेदनशील बनी हुई है। विधानसभा चुनाव के बाद किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था, जिसके बाद कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों के समर्थन से टीवीके ने सरकार बनाई थी। इसी वजह से विपक्ष लगातार सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाता रहा है।
विपक्ष पहले भी उठा चुका है सरकार की स्थिरता पर सवाल
डीएमके नेतृत्व पहले भी कई बार यह दावा कर चुका है कि मौजूदा सरकार के पास पर्याप्त बहुमत नहीं है। विपक्ष का कहना रहा है कि राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए सरकार के लिए पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करना आसान नहीं होगा। हालांकि सत्तारूढ़ पक्ष इन दावों को लगातार खारिज करता रहा है।
जांच जारी, आधिकारिक निष्कर्ष का इंतजार
फिलहाल पुलिस मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर की जाएगी। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी पक्ष की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।