लखनऊ। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े कथित चंदा चोरी मामले को लेकर शुक्रवार को दिनभर कई तरह की चर्चाएं सामने आती रहीं। सोशल मीडिया और कई अन्य माध्यमों पर यह दावा किया गया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, इन खबरों की अब तक किसी आधिकारिक संस्था या ट्रस्ट की ओर से पुष्टि नहीं की गई है।
मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने भी स्थिति स्पष्ट की है। परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने चंपत राय के इस्तीफे से जुड़ी खबरों को पूरी तरह निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि उनके पास इस संबंध में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। वहीं, VHP अध्यक्ष आलोक कुमार ने बताया कि अयोध्या में वरिष्ठ पदाधिकारियों की एक बैठक जरूर हुई थी, लेकिन बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी उन्हें भी नहीं है।
एसआईटी जांच के बाद बढ़ी हलचल
सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट में कुछ महत्वपूर्ण बिंदु सामने आने की चर्चा है, जिसके बाद मामले से जुड़े कुछ लोगों पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आधिकारिक जानकारी में अभी भी चंपत राय महासचिव और अनिल मिश्रा ट्रस्टी के पद पर बने हुए हैं।
मामले की जांच फिलहाल जारी है और किसी भी पदाधिकारी के इस्तीफे को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में सोशल मीडिया पर चल रही खबरों को लेकर स्थिति साफ नहीं हो पाई है।
7 जून से शुरू हुआ था विवाद
राम मंदिर चढ़ावे में कथित अनियमितता का मुद्दा उस समय चर्चा में आया, जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 7 जून को इस मामले को उठाया। इसके बाद सरकार ने मामले की जांच के लिए 13 जून को विशेष जांच टीम का गठन किया।
जांच टीम ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप दी। इसके बाद 25 जून की रात इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया। अगले ही दिन पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आठ लोगों को गिरफ्तार किया।
आगे की कार्रवाई पर नजर
फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं। चंदा संग्रह, उससे जुड़े रिकॉर्ड और कथित अनियमितताओं की पड़ताल की जा रही है। वहीं, ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों के इस्तीफे की खबरों पर भी सभी की नजर बनी हुई है।