मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ करीब एक घंटे तक सैन्य कार्रवाई करते हुए मिसाइल-ड्रोन लॉन्च साइट्स और तटीय रडार ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान ने युद्धविराम (सीजफायर) का उल्लंघन किया था, जिसके जवाब में यह कार्रवाई की गई।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, 25 जून को ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में सिंगापुर के कार्गो शिप ‘एमवी एवर लवली’ पर ड्रोन हमला किया था। इसी घटना को अमेरिकी कार्रवाई का प्रमुख कारण बताया गया है। दूसरी ओर, ईरानी समाचार एजेंसी के मुताबिक, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स की नौसेना ने दावा किया है कि उसने जवाबी कार्रवाई में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
ईरान की संसद के सदस्य इब्राहिम अजीजी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अमेरिका की कार्रवाई को वार्ता के बीच किया गया हमला बताया। उन्होंने कहा कि युद्धविराम का उल्लंघन अमेरिका के लिए भविष्य में पछतावे का कारण बनेगा।
इसी बीच ईरान ने अमेरिका और इजराइल का समर्थन करने वाले NATO सदस्य देशों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि जिन देशों ने इस सैन्य अभियान का समर्थन किया है, उन्हें इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने इस कार्रवाई का समर्थन क्यों किया।
समुद्री सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। ओमान के तट के पास होर्मुज स्ट्रेट में एक मालवाहक जहाज पर अज्ञात हथियार से हमला हुआ, जिसमें जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुंचा। हालांकि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। सुरक्षा हालात बिगड़ने के कारण संयुक्त राष्ट्र ने करीब 11 हजार नाविकों को निकालने का अभियान फिलहाल रोक दिया है।
वहीं, लेबनान में भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के अल-मंसूरी क्षेत्र के लोगों को घर खाली करने की चेतावनी जारी की है। इसके जवाब में हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने कहा कि इजराइल को लेबनान की पूरी जमीन से बिना किसी शर्त के हटना होगा और संगठन किसी भी स्थिति में इजराइल के साथ संबंध सामान्य नहीं करेगा।
हालांकि बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी स्तर की वार्ता पूरी हो चुकी है। दोनों देशों ने चार संयुक्त समितियां गठित करने और अगले 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते का रोडमैप तैयार करने पर सहमति जताई है। रूस ने भी संकेत दिया है कि यदि समझौता होता है तो वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उसका समर्थन करेगा।
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि सभी विवादों का समाधान बातचीत से होना चाहिए, लेकिन यदि हिंसा जारी रहती है तो अमेरिका भी उसी तरह जवाब देगा। उन्होंने ईरान से अपील की कि यदि समझौते के क्रियान्वयन को लेकर कोई मतभेद है तो उसे सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए।