फीफा वर्ल्ड कप 2026 के बीच जर्मनी की टीम को बड़ा झटका लगा है। टीम के प्रमुख सेंट्रल डिफेंडर निको श्लोटरबेक गंभीर चोट के कारण पूरे टूर्नामेंट से बाहर हो गए हैं। उनकी अनुपस्थिति जर्मन टीम के लिए एक बड़ा नुकसान मानी जा रही है, क्योंकि वह हाल के मुकाबलों में डिफेंस की सबसे अहम कड़ी बनकर उभरे थे।
बोरुसिया डॉर्टमुंड के लिए खेलने वाले 26 वर्षीय श्लोटरबेक को आइवरी कोस्ट के खिलाफ ग्रुप-ई के मुकाबले के दौरान चोट लगी थी। यह मैच जर्मनी ने 2-1 से जीता था, लेकिन मुकाबले के दौरान चोटिल होने के बाद श्लोटरबेक को हाफ टाइम में मैदान छोड़ना पड़ा। उनकी जगह अनुभवी डिफेंडर एंटोनियो रुडिगर को मैदान में उतारा गया था।
मैच के बाद कराए गए मेडिकल स्कैन में पता चला कि श्लोटरबेक के बाएं टखने का मीडियल कोलेटरल लिगामेंट फट गया है। जर्मन फुटबॉल संघ ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए बताया कि इस चोट से उबरने में कई महीने लग सकते हैं। हालांकि वह फिलहाल अमेरिका में टीम के साथ ही बने रहेंगे और खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाते रहेंगे।

यह चोट ऐसे समय आई है जब श्लोटरबेक अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ दौर में दिखाई दे रहे थे। जर्मनी के मुख्य कोच जूलियन नागेल्समैन की रणनीति में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण थी। शानदार डिफेंस के साथ-साथ गेंद को पीछे से आगे बढ़ाने की उनकी क्षमता टीम के खेल का अहम हिस्सा बन चुकी थी। टूर्नामेंट के नियमों के अनुसार अब जर्मनी उनकी जगह किसी नए खिलाड़ी को टीम में शामिल नहीं कर सकता।
जर्मन कोच जूलियन नागेल्समैन ने श्लोटरबेक के बाहर होने पर निराशा जताई है। उन्होंने कहा कि टीम मैदान पर उनकी कमी को निश्चित रूप से महसूस करेगी। नागेल्समैन के अनुसार श्लोटरबेक न केवल एक बेहतरीन डिफेंडर हैं, बल्कि उनका बिल्ड-अप प्ले भी जर्मनी के लिए बेहद अहम रहा है। कोच ने यह भी कहा कि चोट के बाद पूरी टीम ने उनका मनोबल बढ़ाने की कोशिश की और सकारात्मक सोच के कारण वह इस मुश्किल समय का मजबूती से सामना कर रहे हैं।
नागेल्समैन ने यह भी स्पष्ट किया कि मैदान के बाहर भी श्लोटरबेक का टीम पर सकारात्मक प्रभाव रहता है। उन्होंने कहा कि टीम के पास अभी भी सेंट्रल डिफेंस में जोनाथन ताह, एंटोनियो रुडिगर, वाल्डेमर एंटन और मलिक थियाव जैसे मजबूत विकल्प मौजूद हैं, जो आने वाले मुकाबलों में जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।
हालांकि इस चोट ने जर्मनी की योजनाओं को प्रभावित किया है, लेकिन टीम का प्रदर्शन अब तक शानदार रहा है। चार बार की विश्व चैंपियन जर्मनी ने ग्रुप-ई में शीर्ष स्थान सुनिश्चित कर लिया है और 12 वर्षों में पहली बार नॉकआउट चरण में जगह बनाई है। अब टीम गुरुवार को इक्वाडोर के खिलाफ अपना आखिरी ग्रुप मुकाबला खेलेगी, जिसके बाद उसकी नजरें नॉकआउट दौर में मजबूत प्रदर्शन पर होंगी।