NFHS-6 रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: देश में तेजी से बढ़ रहे डायबिटीज और मोटापे के मामले

Vin News Network
Vin News Network
4 Min Read
NFHS-6 रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

कोरोना महामारी के बाद भारत में लोगों की जीवनशैली में आए बदलाव का असर अब स्वास्थ्य आंकड़ों में साफ दिखाई देने लगा है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 (NFHS-6) की ताजा रिपोर्ट ने देश में बढ़ते मोटापे और हाई ब्लड शुगर के मामलों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि शारीरिक गतिविधियों में कमी, असंतुलित खानपान और बदलती जीवनशैली के कारण डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी NFHS-6 सर्वे वर्ष 2023-24 के दौरान किया गया था। इस सर्वे में मणिपुर को छोड़कर देश के 715 जिलों के लगभग 6.79 लाख परिवारों को शामिल किया गया। रिपोर्ट में स्वास्थ्य, पोषण और जनसंख्या से जुड़े कई महत्वपूर्ण संकेतकों का विश्लेषण किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, 15 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में डायबिटीज के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। सर्वे में ऐसे लोगों को शामिल किया गया जिनका ब्लड शुगर स्तर 141 mg/dl से अधिक था या जो इस बीमारी को नियंत्रित करने के लिए नियमित दवाओं का सेवन कर रहे थे। आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में डायबिटीज के मामलों में लगभग 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

पुरुषों में यह समस्या तेजी से बढ़ी है। देश में 15 वर्ष से अधिक उम्र के करीब 56 करोड़ पुरुषों में से लगभग 11.7 करोड़ पुरुष डायबिटीज से प्रभावित पाए गए हैं। वर्ष 2021 में यह संख्या करीब 8.7 करोड़ थी। NFHS-5 में जहां 15.6 प्रतिशत पुरुष मधुमेह से पीड़ित थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 20.9 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

महिलाओं में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। वर्तमान में देश की लगभग 7.12 करोड़ महिलाएं डायबिटीज से प्रभावित हैं, जबकि तीन वर्ष पहले यह संख्या करीब 5.4 करोड़ थी। महिलाओं में मधुमेह की दर 13.5 प्रतिशत से बढ़कर 17.8 प्रतिशत हो गई है, जो तेजी से बढ़ते स्वास्थ्य जोखिम की ओर संकेत करती है।

रिपोर्ट में मोटापे और ओवरवेट की समस्या में भी बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में वर्ष 2019-21 के दौरान जहां 24 प्रतिशत महिलाएं ओवरवेट या मोटापे से प्रभावित थीं, वहीं 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 30.7 प्रतिशत हो गया। शहरी क्षेत्रों में स्थिति और अधिक गंभीर है, जहां 42.8 प्रतिशत महिलाएं ओवरवेट या मोटापे की श्रेणी में पाई गईं।

पुरुषों में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला है। वर्ष 2019-21 में 22.9 प्रतिशत पुरुष ओवरवेट या मोटापे से प्रभावित थे, जो अब बढ़कर 27.3 प्रतिशत हो गए हैं। शहरी क्षेत्रों में 36.3 प्रतिशत पुरुष और ग्रामीण क्षेत्रों में 23 प्रतिशत पुरुष ओवरवेट या मोटापे की समस्या से जूझ रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते मोटापे और हाई ब्लड शुगर के मामले आने वाले वर्षों में डायबिटीज, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। ऐसे में नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *