भगवान राम पर टिप्पणी मामले में राहुल गांधी को झटका, एफआईआर खारिज करने का आदेश रद्द

Vin News Network
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राहुल गांधी को झटका!

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की मुश्किलें भगवान राम पर की गई कथित टिप्पणी को लेकर बढ़ती नजर आ रही हैं। वाराणसी की सांसद-विधायक अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज शिकायत को खारिज करने वाले निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया का रास्ता खुल गया है और निचली अदालत को मामले पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया गया है।

यह मामला राहुल गांधी के उस बयान से जुड़ा है, जो उन्होंने वर्ष 2025 में अमेरिका के बोस्टन स्थित ब्राउन यूनिवर्सिटी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि राहुल गांधी ने अपने संबोधन में भगवान राम को करुणा, क्षमा और धार्मिकता का प्रतीक बताते हुए उन्हें एक पौराणिक और काल्पनिक व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत किया था। शिकायत में कहा गया है कि इस टिप्पणी से करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।

मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता हरिशंकर पांडे ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि पहले अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) की अदालत ने शिकायत को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि बयान विदेश में दिया गया था, इसलिए किसी भी कानूनी कार्रवाई से पहले केंद्र सरकार की अनुमति आवश्यक होगी।

हालांकि पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए सांसद-विधायक अदालत के न्यायाधीश यजुर्वेद विक्रम सिंह ने निचली अदालत के फैसले को सही नहीं माना। अदालत ने कहा कि शिकायत दर्ज करने या प्रारंभिक स्तर पर उस पर विचार करने के लिए केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति जरूरी नहीं है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि राहुल गांधी सांसद जरूर हैं, लेकिन इस मामले में उन्हें लोक सेवक की उस श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, जिसके लिए अभियोजन से पहले विशेष अनुमति अनिवार्य हो।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि केवल तकनीकी आधार पर शिकायत को खारिज नहीं किया जा सकता। इसलिए निचली अदालत को निर्देश दिया गया है कि वह मामले के तथ्यों और उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के आधार पर शिकायत पर पुनर्विचार करे और उचित आदेश पारित करे।

अदालत के इस फैसले के बाद राहुल गांधी से जुड़े इस मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा तेज कर दी है। अब सभी की नजरें निचली अदालत की अगली सुनवाई और उसके निर्णय पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि मामले में आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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