उत्तर प्रदेश के नोएडा में वेतनवृद्धि और अन्य मांगों को लेकर श्रमिकों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। पिछले एक सप्ताह से शुरू हुआ यह विरोध कपड़ा ट्रेडर्स के कर्मचारियों की हड़ताल से शुरू होकर अब कई फैक्ट्रियों और कंपनियों तक फैल चुका है। सेक्टर 62 से लेकर सेक्टर 82 और सेक्टर-84 तक हजारों श्रमिक सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। कई जगहों पर हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं, जिसमें पुलिस की गाड़ियों को पलट दिया गया और कुछ वाहनों में आगजनी भी की गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले तक दागने पड़े हैं।
इस पूरे घटनाक्रम पर अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सरकार और प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि महंगाई और बेरोजगारी बढ़ने के कारण मजदूरों में आक्रोश है और उनकी मांगों की अनदेखी की गई है।
वहीं, सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। नोएडा पुलिस ने दो सोशल मीडिया हैंडल्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, जिन पर फर्जी खबरें फैलाकर स्थिति को भड़काने का आरोप है।
इसी बीच बुलंदशहर के सिकंदराबाद औद्योगिक क्षेत्र में भी कर्मचारियों ने कम वेतन और सुविधाओं की कमी को लेकर प्रदर्शन किया, हालांकि पुलिस के समझाने पर वहां स्थिति नियंत्रण में आ गई… पूरे मामले पर लखनऊ से भी नजर रखी जा रही है। डीजीपी राजीव कृष्ण और एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश लगातार कंट्रोल रूम से हालात की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। बढ़ते तनाव को देखते हुए गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट में सभी पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं और उन्हें तुरंत ड्यूटी पर लौटने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदर्शन का असर यातायात पर भी साफ दिखाई दे रहा है। चिल्ला बॉर्डर पर ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है और यमुना एक्सप्रेसवे तक लंबा जाम लग गया है। इसके अलावा दिल्ली बॉर्डर और गाजियाबाद की ओर भी भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी हुई है, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल प्रशासन हालात को काबू में लाने की कोशिश में जुटा हुआ है।