एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच हुए दो हफ्ते के युद्धविराम में पाकिस्तान ने एक ‘बैक-चैनल’ यानी गुप्त रास्ते के तौर पर काम किया है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ने ईरान तक अपनी बात और शर्तें पहुंचाने के लिए पाकिस्तान को एक ‘मैसेंजर’ की तरह इस्तेमाल किया. रणनीति यह थी कि एक मुस्लिम बहुल पड़ोसी देश होने के नाते पाकिस्तान के जरिए भेजा गया संदेश ईरान के लिए ज्यादा स्वीकार्य हो सकता है.
इस पूरे कूटनीतिक घटनाक्रम में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की अहम भूमिका रही. उन्होंने अमेरिकी नेतृत्व के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से सीधे बातचीत की. इस दौरान पाकिस्तानी अधिकारी वाशिंगटन और तेहरान के बीच प्रस्तावों को एक-दूसरे तक पहुंचाते रहे.
खबरों के मुताबिक, पाकिस्तान ने अमेरिका की ओर से तैयार 15-सूत्रीय योजना ईरान तक पहुंचाई थी. इसके जवाब में ईरान ने भी अपने कुछ प्रस्ताव भेजे. काफी बातचीत के बाद ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के कुछ हिस्सों पर सीमित रियायत देने को तैयार हुआ, जिसके बाद इस दो हफ्ते के युद्धविराम का रास्ता साफ हुआ. हालांकि, इस दौरान राष्ट्रपति ट्रंप के सार्वजनिक बयान काफी सख्त रहे और उन्होंने ईरान को कड़ी चेतावनी भी दी.
एक और दिलचस्प बात यह सामने आई है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया पर ट्रंप से समयसीमा बढ़ाने की जो अपील की थी, वह कथित तौर पर व्हाइट हाउस की मंजूरी के बाद ही पोस्ट की गई थी. पर्दे के पीछे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तालमेल काफी गहरा था. पाकिस्तान ने इस दौरान दोनों पक्षों के बीच एक मध्यस्थ की तरह काम किया ताकि संघर्ष को अस्थायी रूप से रोका जा सके और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सके.