उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब Shaukat Ali ने अपने संभावित “एनकाउंटर” को लेकर एक और बयान दे दिया। All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (AIMIM) के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने दावा किया कि उनका नाम उर्दू में होने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा सकता है और उनका भी जल्द एनकाउंटर हो सकता है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
शौकत अली ने आरोप लगाया कि मेरठ पुलिस ने उनके और पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ राजनीतिक दबाव में फर्जी मुकदमा दर्ज किया है। उनके अनुसार पुलिस ने उनके बयान को पूरी तरह सुने बिना ही कार्रवाई कर दी। उन्होंने कहा कि उनके भाषण को संदर्भ से हटाकर पेश किया गया, जबकि उन्होंने संवैधानिक तरीके से काम करने की बात कही थी।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि यह कार्रवाई Bharatiya Janata Party (भाजपा) और Samajwadi Party (सपा) के नेताओं के दबाव में की गई है। शौकत अली ने कहा कि उन्हें डर है कि राजनीतिक कारणों से उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है, यहां तक कि एनकाउंटर भी हो सकता है। “हम उर्दू नाम वाले हैं, इसलिए हमें डर है,” उन्होंने कहा।
यह विवाद उनके पहले दिए गए बयान के बाद शुरू हुआ था। ईद मिलन कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि यदि उनकी पार्टी को उत्तर प्रदेश विधानसभा में 111 नहीं, सिर्फ 11 विधायक भी मिल जाएं तो वे अपनी ताकत दिखा देंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि राज्य में किसी मुसलमान की हत्या होती है तो उसका भी “एनकाउंटर” किया जाएगा। इस बयान को प्रशासन ने भड़काऊ माना और कानून व्यवस्था के लिए खतरा बताया।
इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छह नेताओं के खिलाफ केस दर्ज किया। Lohia Nagar Police Station क्षेत्र की पुलिस ने तीन नेताओं को गिरफ्तार भी किया, जिनमें AIMIM के पश्चिमी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष मेहताब चौहान, महानगर अध्यक्ष इमरान अंसारी और महानगर सचिव रजी सिद्दीकी शामिल हैं। बाद में कोर्ट से इन सभी को जमानत मिल गई।
विवाद बढ़ने के बाद शौकत अली ने सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने हिंसा या गैर-कानूनी कार्रवाई की नहीं, बल्कि संवैधानिक तरीके से न्याय दिलाने की बात कही थी। उनके अनुसार उनके खिलाफ राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था, राजनीतिक बयानबाजी और अल्पसंख्यक राजनीति पर नई बहस छेड़ दी है। विपक्षी दल इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक दबाव का मामला बता रहे हैं, जबकि सरकार समर्थक नेताओं का कहना है कि भड़काऊ बयान किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकते।
मामला कानूनी प्रक्रिया में है और पुलिस जांच जारी है। लेकिन शौकत अली के लगातार आ रहे बयानों ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और गर्मा सकता है।