ईरान संकट में चीन vs भारत: पेट्रोल-डीजल के दामों का तुलनात्मक विश्लेषण

Vin News Network
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चीन में पेट्रोल ₹63/लीटर

मध्य पूर्व में ईरान-अमेरिका युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया है। होर्मुज स्ट्रेट की अस्थिरता से तेल आपूर्ति पर संकट मंडरा रहा है। ऐसे में चीन ने मार्च में दूसरी बार ईंधन कीमतें बढ़ाईं, जबकि भारत ने स्थिरता बनाए रखी। आइए जानें दोनों देशों में पेट्रोल-डीजल कितने महंगे हैं।

चीन ने 10 दिन में दो बार बढ़ाए दाम
चीन का नेशनल डेवलपमेंट एंड रिफॉर्म कमिशन हर 10 दिन में ईंधन दरों की समीक्षा करता है। मार्च में पहली बढ़ोतरी: पेट्रोल 695 युआन/टन, डीजल 670 युआन/टन। दूसरी बढ़ोतरी: पेट्रोल 1160 युआन/टन (80.5 USD), डीजल 1115 युआन/टन (77.5 USD)। यह वैश्विक क्रूड महंगाई का सीधा असर है।

चीन की तेल निर्भरता सबसे अधिक
दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक चीन 70% कच्चा तेल विदेश से खरीदता है। 45% आपूर्ति होर्मुज स्ट्रेट से आती है। युद्ध से 30% तेल सप्लाई पर खतरा है। इसलिए चीन ने दाम बढ़ाकर घरेलू अर्थव्यवस्था को बचाने की रणनीति अपनाई। रिफाइनरी मार्जिन बचाने और स्टॉक बनाने के लिए खुदरा दाम ऊंचे रखे।

भारत की स्थिरता रणनीति
भारत ने वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद ईंधन दरें स्थिर रखीं। वर्तमान दरें:

  • दिल्ली: पेट्रोल ₹94.77/लीटर, डीजल ₹87.67/लीटर
  • मुंबई: पेट्रोल ₹103.54/लीटर, डीजल ₹90.03/लीटर

सरकार ने तेल कंपनियों को नुकसान उठाने को कहा। रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) में 5 मिलियन टन स्टॉक है। रूस से सस्ता तेल आयात बढ़ाया गया।

लीटर बनाम टन: सही तुलना
चीन में दाम प्रति टन आधारित हैं (1 टन पेट्रोल 1350 लीटर, डीजल 1180 लीटर):

  • पेट्रोल: 1160 युआन/टन ÷ 1350 = ₹63/लीटर (7.25 युआन/लीटर)
  • डीजल: 1115 युआन/टन ÷ 1180 = ₹62/लीटर (6.98 युआन/लीटर)

भारत vs चीन तुलना (प्रति लीटर):

ईंधन दिल्ली (₹) मुंब ई (₹) चीन (₹) अंतर
ईंधन दिल्ली (₹) मुंबई (₹) चीन (₹) अंतर
पेट्रोल 94.77 103.54 63 +51%
डीजल 87.67 90.03 62 +45%
कर-टैक्स का जादू


भारत में 50% से अधिक टैक्स (एक्साइज + VAT)। चीन में कर कम। इसलिए कच्चे दाम एक समान होने पर भी खुदरा दाम दोगुने। भारत सरकार को प्रतिदिन ₹9000 करोड़ टैक्स मिलता है।

रणनीतिक अंतर

चीन: दाम तुरंत क्रूड से लिंक, अर्थव्यवस्था संरक्षण

भारत: राजनीतिक स्थिरता, सब्सिडी तेल कंपनियों को, SPR उपयोग


होर्मुज अगर पूरी तरह बंद हुआ तो दोनों देश प्रभावित। भारत का रूस+सऊदी त्रिकोण मजबूत। चीन अमेरिका पर निर्भर नहीं हो सकता। भारत में गर्मी से पहले दाम स्थिर रखना प्राथमिकता।

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