मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़े युद्ध के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव चरम पर है और दुनिया भर में तेल आपूर्ति को लेकर गहरी चिंता बनी हुई है। इस बीच donald trump ने भारत को रूस से तेल खरीदने की अनुमति देने की बात कही, जिसके बाद राजनीतिक और कूटनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। शनिवार को केंद्र सरकार ने इस पूरे मामले पर अपना पक्ष साफ शब्दों में रख दिया।
भारत का स्पष्ट संदेश
केंद्र सरकार ने दो टूक कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए जहां से भी सबसे सस्ता और बेहतर तेल मिलेगा, वहीं से खरीदेगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि होर्मुज मार्ग पर तनाव बढ़ने के बावजूद भारत की ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित और स्थिर बनी हुई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह कही गई कि रूस से तेल खरीदने के लिए भारत को किसी भी देश की अनुमति की जरूरत न पहले थी, न अब है।
27 से 40 देशों तक फैला तेल का जाल
सरकार ने बताया कि भारत ने अपनी दूरदर्शिता का परिचय देते हुए कच्चे तेल के स्रोतों को केवल 27 देशों से बढ़ाकर 40 देशों तक विस्तारित कर दिया है। इससे कई वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग सुनिश्चित हो गए हैं और किसी एक रास्ते पर निर्भरता खत्म हो गई है। भारत अपने राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखते हुए सबसे किफायती दरों पर तेल खरीदने की नीति पर चलता रहेगा।
रूस बना सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता
सरकार ने पुष्टि की कि फरवरी 2026 में भी भारत रूस से तेल का आयात कर रहा है और रूस अभी भी भारत का सबसे बड़ा कच्चे तेल का आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। गौरतलब है कि रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका और यूरोपीय संघ की आपत्तियों के बावजूद भारत ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा। वर्ष 2022 के बाद रूसी तेल पर मिलने वाली भारी छूट और घरेलू रिफाइनरियों की मांग के चलते इस आयात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
250 मिलियन बैरल का मजबूत भंडार
केंद्र सरकार ने बताया कि भारत के पास इस समय 250 मिलियन बैरल से अधिक कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का रणनीतिक भंडार मौजूद है। यह भंडार देश की सात से आठ सप्ताह की खपत के बराबर है। इसके अलावा भारत की कुल रिफाइनिंग क्षमता 258 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है जो मौजूदा घरेलू मांग से भी अधिक है। इन आंकड़ों से साफ है कि किसी भी वैश्विक संकट की स्थिति में भारत आत्मनिर्भर बना रह सकता है।