दिल्ली के भारत मंडपम में शुक्रवार (20 फरवरी) को आयोजित AI समिट 2026 के दौरान राजनीतिक माहौल गरम हो गया। इस सम्मेलन के दौरान यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने न केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगाए बल्कि अपने विरोध को और प्रभावी बनाने के लिए टी-शर्ट उतारकर “पीएम इज कॉम्प्रोमाइज्ड” जैसे नारे भी लगाए। इस प्रदर्शन ने सम्मेलन स्थल और आसपास के इलाकों में भारी हलचल पैदा कर दी।
यूथ कांग्रेस का यह विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से भारत-अमेरिका के बीच हाल ही में हुई व्यापार डील के खिलाफ था। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह डील भारत के हितों के खिलाफ है और इसे जल्दबाजी में किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे समझौते से आम भारतीय नागरिक और छोटे उद्योग प्रभावित हो सकते हैं। प्रदर्शनकारी इस बात पर भी जोर दे रहे थे कि सरकार ने देशहित के बजाय अमेरिकी हितों को प्राथमिकता दी है।
इस प्रदर्शन के बाद भाजपा ने कांग्रेस के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। शनिवार (21 फरवरी) को देशभर में भाजपा के कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात और जम्मू-कश्मीर में भाजपा ने कांग्रेस कार्यालयों और प्रमुख स्थानों पर विरोध दर्ज कराया। दिल्ली में विशेष रूप से कांग्रेस कार्यालय के बाहर बीजेपी युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने “देशद्रोही राहुल गांधी माफी मांगे” जैसे पोस्टर लेकर विरोध किया।
भाजपा के विरोध प्रदर्शन के कारण दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। अकबर रोड पर दो लेयर बैरिकेड लगाकर क्षेत्र को बंद कर दिया गया था, ताकि विरोध और प्रदर्शन के दौरान स्थिति नियंत्रण में रहे। हालांकि, गुस्साए भाजपा कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड को तोड़ दिया और अपने विरोध का इज़हार किया। इस दौरान दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष विनोद सचदेव और सांसद मनोज तिवारी भी प्रदर्शन में मौजूद रहे और उन्होंने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया।
भाजपा का कहना है कि कांग्रेस का यह प्रदर्शन न केवल असंगठित और अनुचित था, बल्कि यह राष्ट्रीय हितों के खिलाफ भी है। भाजपा नेताओं ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस इस तरह के प्रदर्शनों से राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है, खासकर आगामी चुनावों के मद्देनजर। पार्टी ने कहा कि कांग्रेस को देशहित की बजाय राजनीति की चिंता है, और ऐसे प्रदर्शन केवल राजनीतिक रंग में रंगे हुए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने AI समिट 2026 और उसके आस-पास राजनीतिक तापमान को काफी बढ़ा दिया है। यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन और भाजपा के विरोध ने सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं को भी सक्रिय कर दिया है। ट्विटर और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म पर दोनों दलों के समर्थक अपने-अपने दृष्टिकोण को साझा कर रहे हैं और जनता में इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक टकराव से आम जनता में混乱 और भ्रम पैदा हो सकता है। राजनीतिक दलों के बीच यह टकराव केवल स्थानीय या राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत की छवि पर असर डाल सकता है। ऐसे समय में जब AI समिट जैसे वैश्विक मंच पर भारत अपनी तकनीकी और व्यापारिक क्षमता को प्रदर्शित करने का प्रयास कर रहा है, इस प्रकार के विवाद कार्यक्रम की छवि को प्रभावित कर सकते हैं।
इस प्रदर्शन और विरोध ने यह भी दिखा दिया कि राजनीतिक दल देशहित और चुनावी राजनीति के बीच संतुलन बनाए रखने में चुनौती का सामना कर रहे हैं। कांग्रेस ने अपने प्रदर्शन के जरिए ट्रेड डील के खिलाफ अपना विरोध जताया, जबकि भाजपा ने इसे देशभक्ति के मुद्दे के रूप में पेश किया। इससे स्पष्ट है कि आगामी महीनों में राजनीतिक और चुनावी रणनीतियों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।
AI समिट 2026 न केवल तकनीकी और व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि इसने राजनीतिक बहस और विरोध प्रदर्शन के नए आयाम भी पेश किए। यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन और भाजपा के देशव्यापी विरोध ने राजनीतिक परिदृश्य में हलचल पैदा कर दी है। अब देखना यह है कि केंद्र सरकार इस पर कैसे प्रतिक्रिया देती है और आने वाले समय में राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर क्या रणनीति अपनाई जाती है।