वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर तेजी पकड़ चुकी हैं और यह छह महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। शुक्रवार को Brent Crude की कीमत 21 सेंट यानी 0.3% बढ़कर 71.87 डॉलर प्रति बैरल हो गई। वहीं West Texas Intermediate (WTI) क्रूड भी 23 सेंट यानी 0.4% बढ़कर 66.66 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
इस बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है, जिसने वैश्विक तेल बाजार को अस्थिर कर दिया है।
अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी चिंता
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को 10-15 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि अगर इस अवधि में परमाणु समझौता नहीं हुआ, तो गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
इसके जवाब में Iran ने सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए लाइव फायरिंग के साथ बड़े पैमाने पर मिलिट्री एक्सरसाइज शुरू कर दी है। इसी दौरान ईरान ने अहम समुद्री मार्ग Strait of Hormuz को अस्थायी रूप से बंद कर दिया।
यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया की लगभग 20% कच्चे तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। ऐसे में इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से वैश्विक सप्लाई प्रभावित हो सकती है और कीमतों में और तेजी आ सकती है।
बढ़ता सैन्य तनाव और बाजार पर असर
ईरान के इस कदम के बाद अमेरिका ने भी इस इलाके में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं।
तेल बाजार हमेशा भू-राजनीतिक घटनाओं के प्रति संवेदनशील रहता है। ऐसे में अगर सप्लाई चेन बाधित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है, जिसका असर सीधे आम लोगों पर पड़ता है।
भारत में क्या है स्थिति?
वैश्विक स्तर पर कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत में फिलहाल राहत बनी हुई है। देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियां हर दिन सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल की कीमतों को अपडेट करती हैं, लेकिन आज कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। वहीं मुंबई में पेट्रोल की कीमत 104.21 रुपये प्रति लीटर और डीजल 92.15 रुपये प्रति लीटर बनी हुई है।
यह स्थिति आम उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी है, लेकिन अगर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में घरेलू कीमतों पर भी इसका असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है, तो तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। खासकर स्ट्रेट ऑफ होरमुज जैसे अहम मार्ग के प्रभावित होने से सप्लाई में बड़ी बाधा आ सकती है।
भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ऐसे में सरकार और तेल कंपनियों को संतुलन बनाकर चलना होगा ताकि आम जनता पर ज्यादा बोझ न पड़े।