बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा उलटफेर: आरोपों से संसद तक का सफर

Vin News Network
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आरोपों से घिरे नेता अब संसद में, बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव

बांग्लादेश की राजनीति ने हालिया आम चुनावों के बाद ऐसा मोड़ लिया है, जिसने पूरे दक्षिण एशिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जिन नेताओं के नाम कभी गंभीर आपराधिक मामलों और यहां तक कि मौत की सजा से जुड़े थे, वे अब देश की संसद में बैठने जा रहे हैं। यह घटनाक्रम केवल राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि न्यायिक और प्रशासनिक फैसलों की दिशा में आए बड़े परिवर्तन का संकेत भी देता है।

इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के तीन प्रमुख नेता हैं। इनमें लुत्फोज्जमान बाबर और अब्दुस सलाम पिंटू BNP से जुड़े हैं, जबकि एटीएम अजहरुल इस्लाम जमात-ए-इस्लामी के वरिष्ठ नेता रहे हैं। कुछ समय पहले तक ये नेता अलग-अलग गंभीर मामलों में फंसे हुए थे। लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद इनके खिलाफ चल रहे मामलों में राहत मिली और अदालतों ने इन्हें बरी कर दिया।

दिसंबर 2024 में अदालत ने 21 अगस्त 2004 के चर्चित ग्रेनेड हमले से जुड़े मामले में कई नेताओं को दोषमुक्त कर दिया। यह हमला उस समय विपक्ष की रैली पर हुआ था, जिसमें कई लोगों की जान गई थी। इस मामले ने वर्षों तक बांग्लादेश की राजनीति को प्रभावित किया। अदालत के फैसले के बाद लुत्फोज्जमान बाबर ने चुनाव में शानदार जीत दर्ज की और अपने प्रतिद्वंद्वी को बड़े अंतर से हराया।

अब्दुस सलाम पिंटू को लेकर भारत में भी चिंता जताई जा रही है। उन पर पहले ऐसे संगठनों से संबंध रखने के आरोप लगे थे, जिन पर भारत में आतंकी घटनाओं से जुड़ाव के आरोप रहे हैं। हालांकि अदालत से राहत मिलने के बाद उन्होंने भी चुनावी मैदान में उतरकर बड़ी जीत हासिल की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जीत केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि सत्ता परिवर्तन के बाद बदले राजनीतिक माहौल का परिणाम है।

तीसरे नेता एटीएम अजहरुल इस्लाम की कहानी और भी जटिल रही है। उन पर 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान गंभीर आरोप लगाए गए थे और उन्हें अदालत से मृत्युदंड भी मिला था। लेकिन बाद में न्यायिक प्रक्रियाओं और राजनीतिक परिस्थितियों के बदलने के साथ उन्हें राहत मिली। अब वे भी संसद का हिस्सा बनने जा रहे हैं।

इन घटनाओं का असर केवल बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं है। भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। नई दिल्ली इस बदलाव को सतर्क नजर से देख रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में द्विपक्षीय संबंध इस बात पर निर्भर करेंगे कि नई सरकार आर्थिक सहयोग, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को किस प्राथमिकता से देखती है।

बांग्लादेश का यह राजनीतिक अध्याय दर्शाता है कि लोकतंत्र में परिस्थितियां कितनी तेजी से बदल सकती हैं। आरोपों और सजा से जुड़े नाम अब लोकतांत्रिक जनादेश के सहारे सत्ता के गलियारों में प्रवेश कर रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बदलाव देश की राजनीति और क्षेत्रीय संतुलन को किस दिशा में ले जाता है।

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