गर्मी के मौसम में बारिश को अक्सर राहत की बूंदों के रूप में देखा जाता है। लोगों को उम्मीद होती है कि बारिश के बाद तापमान कम होगा और मौसम सुहावना हो जाएगा। लेकिन अक्सर इसका उल्टा असर देखने को मिलता है — बारिश के बाद गर्मी और उमस और भी बढ़ जाती है। पसीना ज्यादा आता है, शरीर चिपचिपा महसूस करने लगता है और लोगों को बेचैनी होने लगती है।
तो क्या आपने कभी सोचा है कि बारिश के बाद ठंडक की जगह और ज्यादा गर्मी क्यों लगती है? इसका कारण सिर्फ तापमान नहीं, बल्कि हवा में नमी यानी ‘ह्यूमिडिटी’ होती है। आइए जानते हैं कि बारिश के बाद ह्यूमिडिटी क्यों बढ़ती है और यह हमारे शरीर पर क्या असर डालती है।
बारिश के बाद ठंडक नहीं, उमस क्यों?
बारिश के दौरान जमीन, पेड़-पौधों, इमारतों पर पानी जमा हो जाता है। जैसे ही बारिश बंद होती है और सूरज निकलता है, तो ये जमा हुआ पानी धीरे-धीरे वाष्पित (Evaporate) होकर वातावरण में मिलने लगता है। इससे हवा में वॉटर वेपर की मात्रा बढ़ जाती है, जो उमस का कारण बनती है।
हवा में मौजूद वॉटर वेपर क्या करता है?
Humidity यानी हवा में वॉटर वेपर (जलवाष्प) की उपस्थिति। जब हवा में यह नमी ज्यादा होती है, तो शरीर से निकलने वाला पसीना आसानी से सूख नहीं पाता। पसीना सूखने की प्रक्रिया से ही शरीर ठंडक महसूस करता है, लेकिन जब यह प्रक्रिया रुक जाती है, तो गर्मी का अहसास और तेज़ हो जाता है।
तापमान और ह्यूमिडिटी का रिश्ता
गर्म हवा ठंडी हवा की तुलना में ज्यादा वॉटर वेपर को पकड़ सकती है। लेकिन जब हवा नमी से पूरी तरह भर जाती है (सैचुरेट हो जाती है), तब यह अतिरिक्त नमी नहीं ले पाती। इस स्थिति में पसीना और धीरे-धीरे सूखता है, जिससे शरीर और गर्म महसूस करता है।
हीट इंडेक्स क्या होता है?
मौसम वैज्ञानिक Heat Index का उपयोग करते हैं जिससे पता चलता है कि तापमान और ह्यूमिडिटी मिलकर कैसा असर डाल रही हैं। यानी अगर तापमान 32 डिग्री सेल्सियस है लेकिन हवा में नमी बहुत ज्यादा है, तो शरीर को यह 40 डिग्री से भी अधिक महसूस हो सकता है। यही कारण है कि बारिश के बाद भले ही तापमान घट जाए, लेकिन हीट इंडेक्स बढ़ जाता है।
शरीर पर असर: पसीना, थकावट और बेचैनी
बारिश के बाद बढ़ी उमस से पसीना अधिक आता है, जिससे शरीर चिपचिपा हो जाता है। इससे न केवल थकावट महसूस होती है, बल्कि डिहाइड्रेशन, सिरदर्द और बेचैनी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। खासकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह और भी असहज होता है।
बचाव कैसे करें?
- हल्के और सूती कपड़े पहनें
- खूब पानी पिएं
- धूप में बाहर निकलने से बचें
- ठंडी जगहों पर रहें
- शरीर को बार-बार पोंछते रहें ताकि पसीना सूखे