बसपा के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा में पार्टी के इकलौते विधायक रहे उमाशंकर सिंह के निधन के बाद सबसे बड़ा सवाल उनकी राजनीतिक और आर्थिक विरासत को लेकर उठ रहा है। 55 वर्षीय उमाशंकर सिंह का बुधवार को दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में ब्रेन कैंसर से लंबी जंग के बाद निधन हो गया। उनके निधन से न सिर्फ बसपा बल्कि पूर्वांचल की राजनीति में भी एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है।
रसड़ा (बलिया) विधानसभा सीट से लगातार तीन बार विधायक रहे उमाशंकर सिंह अपने मजबूत जनाधार, संगठन क्षमता और कारोबारी पहचान के लिए जाने जाते थे। उनके परिवार में पत्नी पुष्पा सिंह, पुत्र प्रिंस युकेश सिंह और बेटी यामिनी हैं। अब चर्चा इस बात की है कि क्या उनके बेटे प्रिंस युकेश सिंह राजनीतिक जिम्मेदारी भी संभालेंगे या फिलहाल परिवार का ध्यान केवल कारोबार पर रहेगा।
छात्र राजनीति से बसपा के सबसे मजबूत चेहरे तक का सफर
2 जनवरी 1971 को बलिया जिले के खनवर गांव में जन्मे उमाशंकर सिंह ने छात्र राजनीति से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी। बाद में उन्होंने ठेकेदारी के क्षेत्र में पहचान बनाई और फिर बहुजन समाज पार्टी से जुड़कर सक्रिय राजनीति में आए।
उन्होंने 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में रसड़ा सीट से लगातार जीत दर्ज की। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में जब बसपा को पूरे उत्तर प्रदेश में सिर्फ एक सीट मिली, तब उमाशंकर सिंह ही पार्टी की ओर से विजयी उम्मीदवार थे। यही वजह थी कि उन्हें बसपा सुप्रीमो मायावती का सबसे भरोसेमंद नेता माना जाता था।
मायावती से रहा बेहद करीबी रिश्ता
उमाशंकर सिंह और बसपा प्रमुख मायावती के बीच बेहद आत्मीय संबंध बताए जाते थे। मायावती उन्हें भाई मानती थीं और रक्षाबंधन पर उन्हें राखी भी बांध चुकी थीं। उनके निधन के बाद मायावती ने शोक संदेश जारी करते हुए परिवार को अपना परिवार बताया और कहा कि उमाशंकर सिंह का परिवार हमेशा बीएसपी परिवार का हिस्सा रहा है। इससे यह भी संकेत मिल रहे हैं कि भविष्य में पार्टी परिवार का साथ बनाए रख सकती है।
बेटे प्रिंस युकेश पर टिकी हैं उम्मीदें
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उमाशंकर सिंह के बेटे प्रिंस युकेश सिंह भविष्य में उनकी राजनीतिक विरासत संभाल सकते हैं। हालांकि वे अभी तक सक्रिय राजनीति में बहुत अधिक दिखाई नहीं दिए हैं, लेकिन सामाजिक कार्यों और अपने पिता के कारोबार में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
प्रिंस युकेश वर्तमान में परिवार की प्रमुख कंपनी सी.एस. इंफ्राकंस्ट्रक्शन लिमिटेड के सीईओ हैं। सड़क निर्माण, पुल, खनन और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं से जुड़ी यह कंपनी पूर्वांचल की प्रमुख निर्माण कंपनियों में गिनी जाती है। कंपनी की मैनेजिंग डायरेक्टर उनकी मां पुष्पा सिंह हैं।
हजार करोड़ के कारोबार की जिम्मेदारी
उमाशंकर सिंह केवल राजनेता ही नहीं बल्कि बड़े कारोबारी भी थे। उनकी कंपनी का वर्ष 2024-25 में लगभग 1000 करोड़ रुपये का कारोबार बताया जाता है। परिवार से जुड़ी अन्य कंपनियां भी निर्माण और खनन क्षेत्र में सक्रिय रही हैं।
साल 2022 के चुनावी हलफनामे के अनुसार उनकी घोषित कुल संपत्ति लगभग 54.05 करोड़ रुपये थी। इसमें चल और अचल दोनों तरह की संपत्तियां शामिल थीं। इसके अलावा उनके पास लखनऊ और बलिया में कई संपत्तियां, व्यावसायिक परिसंपत्तियां तथा निर्माण कार्यों से जुड़े संसाधन भी थे।
क्या बसपा देगी परिवार को राजनीतिक जिम्मेदारी?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बसपा भविष्य में रसड़ा सीट और क्षेत्रीय राजनीति में उमाशंकर सिंह के परिवार को आगे बढ़ाने का प्रयास कर सकती है। मायावती की प्रतिक्रिया और परिवार के साथ उनके पुराने संबंधों को देखते हुए यह संभावना जताई जा रही है कि प्रिंस युकेश सिंह को संगठन या चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है।
हालांकि अंतिम फैसला बसपा नेतृत्व और स्वयं प्रिंस युकेश सिंह की राजनीतिक सक्रियता पर निर्भर करेगा। फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि उमाशंकर सिंह के निधन के बाद उनकी राजनीतिक और आर्थिक विरासत का केंद्र अब उनका परिवार ही रहेगा।