रिपोर्ट्स की माने तो एक विस्तृत साक्षात्कार में ईरान और इजरायल के बीच जारी वर्तमान संघर्ष पर अपनी नई स्थिति स्पष्ट की है. ट्रंप ने ईरानी नागरिकों की क्षमताओं की सराहना करते हुए उन्हें अत्यंत शक्तिशाली और धैर्यवान बताया है. राष्ट्रपति के अनुसार, ईरानी लोग स्वभाव से लड़ाकू होने के बजाय कुशल वार्ताकार हैं. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वर्तमान परिस्थितियों में ईरान के साथ एक औपचारिक समझौता करने का समय आ गया है और वे जल्द ही इस दिशा में प्रगति करना चाहते हैं. यह वक्तव्य उनके पूर्व के कड़ा रुख अपनाने वाले बयानों से भिन्न प्रतीत होता है.
इजरायल की सैन्य भूमिका पर चर्चा करते हुए ट्रंप ने कहा कि इजरायल एक अनुशासित सहयोगी है और वह अमेरिकी निर्देशों के अनुरूप ही कार्य करेगा. उन्होंने दावा किया कि बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली सरकार उनके संकेतों पर सैन्य कार्रवाइयों को नियंत्रित करेगी. ट्रंप के अनुसार, जैसे ही वे युद्ध समाप्त करने का निर्णय लेंगे, इजरायल अपनी सैन्य गतिविधियों को रोक देगा. उन्होंने यह भी जोड़ा कि इजरायल केवल उकसावे की स्थिति में ही अपनी रक्षात्मक कार्रवाई जारी रखने के लिए विवश होगा, अन्यथा वह अमेरिकी राष्ट्रपति के निर्णय का पूर्णतः पालन करेगा.
यह रणनीतिक बदलाव मीडिया को दिए गए बयानों से अलग है, जहां उन्होंने युद्ध समाप्ति को एक आपसी निर्णय बताया था. वर्तमान संघर्ष की पृष्ठभूमि 28 फरवरी को शुरू हुए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ से जुड़ी है, जो ट्रंप के निर्देशों पर ईरान के विरुद्ध संचालित किया गया था. इस सैन्य अभियान के परिणामस्वरूप ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु की पुष्टि हुई थी. रिपोर्ट के अनुसार, इस अभियान के दौरान ट्रंप ने अपने प्रशासन के भीतर से सूचनाएं लीक होने पर नाराजगी व्यक्त की थी और 27 फरवरी को अभियान को रोकने के संकेत भी दिए थे.
साक्षात्कार के दौरान ट्रंप ने स्पष्ट किया कि कूटनीति और बातचीत ही भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेंगे. उन्होंने दोहराया कि उनका उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता लाना है और वे इजरायल के साथ मिलकर इस लक्ष्य की प्राप्ति करेंगे. ट्रंप के इन बयानों को वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण नीतिगत परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है. विशेष रूप से ईरान के प्रति उनकी सकारात्मक टिप्पणियों ने भविष्य की वार्ताओं के लिए एक नया आधार तैयार किया है. राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया कि वे व्यक्तिगत रूप से इन वार्ताओं का नेतृत्व करने के इच्छुक हैं.
वर्तमान में अमेरिका और इजरायल के बीच रणनीतिक समन्वय को लेकर ट्रंप का यह दावा महत्वपूर्ण है कि इजरायल उनके आदेशों का पालन करेगा. इससे यह संकेत मिलता है कि आगामी दिनों में मध्य पूर्व की सैन्य स्थिति में बड़े बदलाव आ सकते हैं. ट्रंप के अनुसार, उनकी प्राथमिकता अब संघर्ष को समाप्त कर एक स्थायी समझौते की ओर बढ़ने की है. रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति का यह नया दृष्टिकोण उनके प्रशासन की आंतरिक चर्चाओं और वैश्विक सुरक्षा समीकरणों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. क्षेत्र के अन्य देश भी इन घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं.