नई दिल्ली। देश की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है। उनके इस्तीफे के पीछे की वजह राज्यसभा में जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की घोषणा को माना जा रहा है।
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार की योजना थी कि जस्टिस वर्मा के खिलाफ लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव लाया जाएगा। लेकिन इससे पहले ही राज्यसभा के सभापति होने के नाते धनखड़ ने अचानक इस प्रक्रिया की शुरुआत उच्च सदन में करने की घोषणा कर दी, जिससे कई वरिष्ठ नेताओं और सरकार के अंदर भी असहमति पैदा हो गई।
धनखड़ के इस कदम को संवैधानिक अधिकारों की सख्त व्याख्या के रूप में देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि उनके इस निर्णय से केंद्र की रणनीति प्रभावित हो रही थी, और इसी कारण उन्होंने पद से हटने का फैसला लिया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को उनका इस्तीफा सौंपते ही उसे तत्काल स्वीकार कर लिया गया। अब नया उपराष्ट्रपति कौन होगा, इस पर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
सवाल उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ एक संवैधानिक निर्णय था या इसके पीछे गहरे राजनीतिक समीकरण काम कर रहे थे? क्या धनखड़ ने अपने पद का इस्तेमाल न्यायपालिका पर सवाल खड़े करने के लिए किया या वह अपने विवेक से निर्णय ले रहे थे? आने वाले दिन इस पर और स्पष्टता लाएंगे।