Vande Mataram: अब दो नहीं, आकाशवाणी पर गूंजेगा ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण

Priyanshu Kumari
Priyanshu Kumari
4 Min Read
अब आकाशवाणी पर बजेगा ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण।

गृह मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार देश में राष्ट्रगीत के प्रसारण को लेकर एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। 28 जनवरी 2026 को जारी आदेश के तहत All India Radio (आकाशवाणी) के सभी केंद्रों पर 26 मार्च 2026 से राष्ट्रगीत का नया संस्करण प्रसारित किया जाएगा। इस निर्णय का उद्देश्य राष्ट्रगीत को अधिक सुव्यवस्थित, मानकीकृत और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध रूप में प्रस्तुत करना है, ताकि देशभर के श्रोताओं तक एक समान और उच्च गुणवत्ता वाला संस्करण पहुंचे।

नए संस्करण की कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड रखी गई है। यह अवधि न तो बहुत लंबी है और न ही बहुत छोटी, बल्कि औपचारिक अवसरों और नियमित प्रसारण दोनों के लिए उपयुक्त मानी जा रही है। आकाशवाणी लंबे समय से राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रमों, संदेशों और संगीत के प्रसारण का प्रमुख माध्यम रहा है, इसलिए इस बदलाव का असर देश के करोड़ों श्रोताओं तक पहुंचेगा।

इस नए संस्करण का प्रारंभिक रिकॉर्डिंग प्रसिद्ध हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक Pandit Chandrashekhar Waje द्वारा की गई है। उन्होंने राष्ट्रगीत को राग देस में प्रस्तुत किया है, जो देशभक्ति और भावनात्मक अभिव्यक्ति के लिए उपयुक्त माना जाता है। राग देस भारतीय शास्त्रीय संगीत में अत्यंत लोकप्रिय है और अक्सर देशभक्ति गीतों में प्रयोग किया जाता है। इस प्रस्तुति में पारंपरिक शास्त्रीय शैली के साथ-साथ आधुनिक रिकॉर्डिंग तकनीक का भी उपयोग किया गया है, जिससे ध्वनि गुणवत्ता बेहतर हो सके।

विशेष बात यह है कि नए संस्करण में भारत की सांस्कृतिक विविधता को भी दर्शाने का प्रयास किया गया है। इसमें विभिन्न क्षेत्रों के वाद्ययंत्रों को शामिल किया गया है, ताकि यह केवल एक संगीत रचना न होकर पूरे देश की सांगीतिक पहचान का प्रतिनिधित्व करे। उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत की अलग-अलग संगीत परंपराओं की झलक इसमें देखने को मिल सकती है।

गृह मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल एक ही संस्करण तक सीमित नहीं रहा जाएगा। क्षेत्रीय वाद्ययंत्रों और स्थानीय संगीत परंपराओं को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रगीत के कई अन्य संस्करण भी रिकॉर्ड किए जा रहे हैं। भविष्य में विशेष अवसरों, राष्ट्रीय पर्वों या क्षेत्रीय प्रसारण के दौरान इन वैकल्पिक संस्करणों का उपयोग किया जा सकता है। इससे देश की बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक पहचान को सम्मान मिलेगा।

इस निर्णय को सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक मानक संस्करण होने से राष्ट्रगीत के गायन और प्रसारण में एकरूपता आएगी, जबकि विभिन्न संस्करणों की उपलब्धता से विविधता भी बनी रहेगी। इससे नई पीढ़ी को भी राष्ट्रगीत से जुड़ने का अवसर मिलेगा और देशभक्ति की भावना को प्रोत्साहन मिलेगा।

26 मार्च 2026 से आकाशवाणी पर शुरू होने वाला यह नया प्रसारण केवल एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक रूप में प्रस्तुत करने की पहल है। आने वाले समय में यह संस्करण देश के रेडियो श्रोताओं के लिए राष्ट्रगीत की एक नई पहचान बन सकता है जो परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम होगा।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *