ईरान और अमेरिका के बीच चल रही तनातनी ने अब एक ऐसा मोड़ ले लिया है, जिसने दुनिया भर के कॉर्पोरेट जगत में चिंता पैदा कर दी है. ईरान की सेना (IRGC) ने इस बार केवल सरहदों या सैन्य ठिकानों की बात नहीं की है, बल्कि सीधे तौर पर गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और एप्पल जैसी 18 बड़ी कंपनियों को धमकी दी है. ईरान का आरोप है कि ये कंपनियाँ पर्दे के पीछे से उनके नेताओं के खिलाफ होने वाली साजिशों में अमेरिका और इजरायल की मदद कर रही हैं.
सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात यह है कि ईरान ने इन कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को चेतावनी देते हुए कहा है कि वे अपनी जान बचाने के लिए फौरन दफ्तर छोड़ दें. यह पहली बार है जब युद्ध की धमकियां सीधे उन लोगों तक पहुँच रही हैं जो लैपटॉप और सॉफ्टवेयर पर काम करते हैं. इससे उन हजारों परिवारों में डर का माहौल है जिनके सदस्य इन टेक कंपनियों का हिस्सा हैं.
दूसरी तरफ, अमेरिका ने इस धमकी को हल्के में नहीं लिया है. व्हाइट हाउस ने बेहद सख्त लहजे में कहा है कि वे अपने नागरिकों और कंपनियों की सुरक्षा करना जानते हैं. उन्होंने याद दिलाया कि ईरान की मिसाइलें और ड्रोन पहले भी नाकाम रहे हैं और अमेरिकी सेना किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए चौबीसों घंटे तैयार है.
देखा जाए तो यह लड़ाई अब सिर्फ दो देशों की सेनाओं के बीच नहीं रही, बल्कि इसमें उन तकनीकी कंपनियों को भी घसीट लिया गया है जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं. सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की धमकियों से ग्लोबल बिजनेस और आम लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है. फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या बातचीत से यह तनाव कम होगा या हालात और बिगड़ेंगे.