अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। 6 फरवरी 2026 को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर राष्ट्रीय आपातकाल को और सख्त करने के लिए नया कार्यकारी आदेश जारी किया। इस आदेश के तहत अब अमेरिका उन देशों पर टैरिफ लगा सकता है, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ईरान से व्यापार या सेवाएं लेते हैं।
इस फैसले का मुख्य उद्देश्य ईरान के आर्थिक ढांचे को कमजोर करना है, ताकि वह परमाणु कार्यक्रम, आतंकवाद के समर्थन, बैलिस्टिक मिसाइल विकास और क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने जैसी गतिविधियों के लिए संसाधन न जुटा सके। आदेश में अमेरिका के विदेश मंत्री, वाणिज्य मंत्री और ट्रेड प्रतिनिधि को नियम तय करने और टैरिफ लागू करने की पूरी छूट दी गई है।
यह आदेश International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) और National Emergencies Act के तहत जारी किया गया है, जो राष्ट्रपति को आपात स्थिति में विदेशी व्यापार पर नियंत्रण का अधिकार देता है। व्हाइट हाउस का मानना है कि ईरान अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए लगातार खतरा बना हुआ है।
ट्रंप प्रशासन पहले भी ईरान पर सख्त नीति अपना चुका है। 2018 में अमेरिका ने ईरान न्यूक्लियर डील से बाहर निकलते हुए “मैक्सिमम प्रेशर” नीति लागू की थी और IRGC को आतंकी संगठन घोषित किया गया था। नया आदेश इसी रणनीति को आगे बढ़ाता है।
हालांकि आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि ईरान या प्रभावित देश अमेरिका के साथ सहयोग करते हैं, तो इसमें संशोधन संभव है। अमेरिका का स्पष्ट कहना है कि ईरान क्षेत्रीय हिंसा, मानवाधिकार उल्लंघन और हथियारों पर खर्च को प्राथमिकता देता है, इसलिए उस पर सख्ती जरूरी है।