देश का आम बजट यानी यूनियन बजट 2026-27 एक फरवरी, रविवार को संसद में पेश किया जाएगा। इसके साथ ही सरकार अगले वित्त वर्ष के लिए अपनी आर्थिक रणनीति और प्राथमिकताओं को सार्वजनिक करेगी। बजट हर साल देश की आर्थिक दिशा तय करने वाला सबसे अहम दस्तावेज माना जाता है, जिस पर आम नागरिकों से लेकर उद्योग, निवेशक और राज्य सरकारें तक बारीकी से नजर रखते हैं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार लगातार नौवां यूनियन बजट पेश करेंगी। यह आज़ादी के बाद भारत का 88वां केंद्रीय बजट होगा। ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है और घरेलू विकास दर को लेकर उम्मीदें टिकी हैं, यह बजट टैक्स, सरकारी खर्च, राजकोषीय अनुशासन और नीतिगत दिशा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
यूनियन बजट क्या होता है?
यूनियन बजट सरकार का वार्षिक लेखा-जोखा होता है, जिसमें यह बताया जाता है कि सरकार अगले वित्त वर्ष में कितना पैसा कमाने की उम्मीद कर रही है और उसे किन-किन क्षेत्रों में खर्च किया जाएगा। इसमें टैक्स से होने वाली आय, सरकारी कंपनियों से मिलने वाला लाभांश, कर्ज और अन्य स्रोतों से आने वाले राजस्व का ब्योरा दिया जाता है।
खर्च की बात करें तो बजट में बुनियादी ढांचे, रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण, ग्रामीण विकास और अन्य क्षेत्रों के लिए प्रस्तावित खर्च को शामिल किया जाता है। संविधान के अनुच्छेद 112 के तहत हर साल संसद में बजट पेश करना अनिवार्य है।
बजट एक फरवरी को ही क्यों पेश किया जाता है?
साल 2017 से पहले आम बजट फरवरी के आखिरी कार्यदिवस पर पेश किया जाता था। लेकिन इसके कारण बजट से जुड़ी योजनाओं और खर्चों को लागू करने में देरी होती थी। इसी वजह से सरकार ने बजट की तारीख बदलकर 1 फरवरी कर दी।
इस बदलाव का उद्देश्य यह था कि सभी मंत्रालयों और विभागों को नई योजनाओं को लागू करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके और 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्त वर्ष की शुरुआत बिना किसी रुकावट के हो सके।
बजट के मुख्य हिस्से कौन-से होते हैं?
यूनियन बजट को आमतौर पर दो बड़े हिस्सों में बांटा जाता है राजस्व बजट और पूंजीगत बजट।
राजस्व बजट में सरकार की रोजमर्रा की आमदनी और खर्च शामिल होते हैं। इसमें इनकम टैक्स, कॉरपोरेट टैक्स, जीएसटी जैसी कर आय और सब्सिडी, वेतन, पेंशन जैसे खर्च दर्ज किए जाते हैं।
वहीं पूंजीगत बजट में लंबी अवधि के निवेश से जुड़े खर्च आते हैं, जैसे सड़क, रेलवे, बंदरगाह, बिजली परियोजनाएं और अन्य बुनियादी ढांचा। इसमें कर्ज, विनिवेश और परिसंपत्तियों की बिक्री से मिलने वाली रकम भी शामिल होती है।
बजट दस्तावेजों में राजकोषीय घाटा, राजस्व घाटा और प्राथमिक घाटा जैसे अहम आंकड़े भी दिए जाते हैं, जिनसे सरकार की वित्तीय सेहत का आकलन किया जाता है।
बजट कैसे तैयार होता है?
बजट बनाने की प्रक्रिया कई महीने पहले शुरू हो जाती है। सभी मंत्रालय और विभाग अपने खर्च के अनुमान और योजनाओं के प्रस्ताव वित्त मंत्रालय को भेजते हैं। इसके बाद उद्योग संगठनों, अर्थशास्त्रियों, किसानों, सामाजिक संगठनों और अन्य हितधारकों के साथ परामर्श किया जाता है।
राजस्व के अनुमान, खर्च की जरूरतों और तय किए गए राजकोषीय लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्रालय अंतिम बजट प्रस्ताव तैयार करता है। बजट पेश होने से पहले पारंपरिक ‘हलवा सेरेमनी’ आयोजित की जाती है, जो बजट दस्तावेजों के गोपनीय चरण की शुरुआत का संकेत होती है। इसके बाद बजट से जुड़े अधिकारी पूरी तरह अलग-थलग रहकर काम करते हैं, ताकि जानकारी बाहर न जाए।
बजट के दिन क्या होता है?
एक फरवरी को वित्त मंत्री लोकसभा में बजट भाषण देती हैं। इस भाषण में टैक्स से जुड़े बदलाव, नई योजनाएं, खर्च की प्राथमिकताएं और नीतिगत घोषणाएं शामिल होती हैं। बजट भाषण के बाद सभी दस्तावेज संसद में रखे जाते हैं और सार्वजनिक कर दिए जाते हैं।
इसके बाद संसद में बजट पर विस्तृत चर्चा होती है। अलग-अलग मंत्रालय अपने खर्च के प्रस्तावों के लिए संसद से मंजूरी मांगते हैं। टैक्स से जुड़े प्रावधानों को वित्त विधेयक के जरिए पारित किया जाता है।
आम लोगों और कारोबार के लिए बजट क्यों अहम है?
आम नागरिकों के लिए बजट इसलिए महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसमें इनकम टैक्स स्लैब, छूट और कटौतियों में बदलाव हो सकता है, जिसका सीधा असर उनकी जेब पर पड़ता है। सेविंग, निवेश और खर्च के फैसले काफी हद तक बजट पर निर्भर करते हैं।
व्यापार और उद्योग के लिए बजट सरकार की आर्थिक सोच को दर्शाता है। इसमें कॉरपोरेट टैक्स, निवेश प्रोत्साहन, इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और सेक्टर-विशेष राहत के संकेत मिलते हैं। निवेशक बजट से सरकार की कर्ज नीति, पूंजीगत खर्च और वित्तीय अनुशासन को लेकर संकेत लेते हैं, जिससे बाजार की दिशा तय होती है।
बजट से जुड़े अहम सवाल (FAQs)
क्या बजट के फैसले तुरंत लागू हो जाते हैं?
अधिकतर टैक्स बदलाव 1 अप्रैल से लागू होते हैं, हालांकि कुछ फैसले तत्काल प्रभाव से भी लागू किए जा सकते हैं।
क्या संसद बजट को खारिज कर सकती है?
संसद बजट पर चर्चा कर उसमें संशोधन कर सकती है, लेकिन पूरे बजट का खारिज होना बेहद दुर्लभ होता है, क्योंकि इससे सरकार पर विश्वास का सवाल खड़ा हो जाता है।
आर्थिक सर्वेक्षण और बजट में क्या फर्क है?
आर्थिक सर्वेक्षण, जो 29 जनवरी को पेश किया जाएगा, देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति का विश्लेषण करता है। बजट उस विश्लेषण के आधार पर ठोस नीतिगत और वित्तीय फैसले पेश करता है।
सभी की नजरें बजट 2026 पर
जैसे-जैसे बजट 2026 नजदीक आ रहा है, सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार आर्थिक विकास को समर्थन देने और राजकोषीय संतुलन बनाए रखने के बीच कैसे संतुलन साधती है। टैक्सपेयर्स, उद्योग, राज्य सरकारें और निवेशक सभी को इस बजट से बड़ी उम्मीदें हैं।