मुंबई में बृहन्मुंबई महापालिका (BMC) चुनाव के नतीजे आने के बाद शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगर भगवान ने चाहा तो मुंबई का अगला महापौर उनकी पार्टी का होगा।
हालांकि, उनकी पार्टी ने सिर्फ 65 सीटें जीती हैं, जबकि 114 सीटों का बहुमत चाहिए। फिर भी, दो परिस्थितियों में उनका महापौर बनना संभव है।
पहला रास्ता: महापौर का आरक्षण ST वर्ग के लिए
मुंबई महापौर के लिए आरक्षण लॉटरी 22 जनवरी को आयोजित की जाएगी। यह तय करेगा कि महापौर कौन-सी श्रेणी (जैसे ST, SC, OBC, महिला या ओपन) के लिए होगा।
अगर इस बार ST वर्ग का आरक्षण निकला, तो शिवसेना (UBT) के लिए रास्ता खुल जाएगा। इसका कारण यह है कि भाजपा और शिंदे शिवसेना के पास कोई ST पार्षद नहीं है, जबकि शिवसेना (UBT) के पास दो ST पार्षद हैं — जितेंद्र वालवी और प्रियदर्शनी ठकरे।
इस स्थिति में ST आरक्षण के नियम के अनुसार केवल ST उम्मीदवार ही महापौर बन सकते हैं, जिससे उद्धव समूह को फायदा होगा।
इसमें बाधाएँ भी हैं
अगर आरक्षण फिर से ओपन कैटेगरी कर दिया गया, तो सभी पार्षद उम्मीदवार महापौर पद के लिए खड़े हो सकते हैं। ऐसे में पारंपरिक बहुमत ही निर्णायक होगा।
साथ ही, इस बार BMC में 10 नामांकित पार्षद भी होंगे। इनका वोट भी महापौर चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
दूसरा रास्ता: भाजपा के साथ अप्रत्यक्ष समझौता
दूसरा रास्ता राजनीतिक समझौते पर आधारित है।
भाजपा ने 89 सीटें जीती हैं और उसका गठबंधन शिंदे शिवसेना के 29 सीटों के साथ मिलकर 114 से ज्यादा हो जाता है। लेकिन शिंदे चाहते हैं कि महापौर का पद उन्हें भी मिले, खासकर बाल ठाकरे की जन्मशताब्दी वर्ष होने के कारण।
राजनीति के खेल से महापौर बनना
शिवसेना (UBT) चाहकर भी चुनाव में अनुपस्थित रह सकती है। इससे कुल बहुमत घटकर 82 हो जाएगा, और भाजपा के 89 वोट खुद में काफी होंगे।
ऐसे में भाजपा अकेले महापौर चुन सकती है। साथ ही, किसी पुराने शिवसैनिक नेता को भी महापौर बनाया जा सकता है, जो सभी पक्षों के लिए स्वीकार्य हो।
आगे क्या होगा?
आरक्षण लॉटरी – 22 जनवरी को तय होगा कि महापौर किस श्रेणी के लिए होगा।
राजनीतिक बैठकों – भाजपा, शिंदे और उद्धव समूह की बातचीत महापौर चुनाव में निर्णायक होगी।
नामांकित पार्षदों की भूमिका – इन 10 वोटर का भी असर परिणाम पर पड़ सकता है।
उद्धव ठाकरे का महापौर बनना असंभव नहीं है।
पहला रास्ता: अगर महापौर का आरक्षण ST वर्ग के लिए हो, तो उनकी पार्टी का ST पार्षद महापौर बन सकता है।
दूसरा रास्ता: अगर भाजपा के साथ अप्रत्यक्ष समझौता हो और उद्धव समूह चुनाव में अनुपस्थित रहे, तो भाजपा आसानी से महापौर चुन सकती है।
इस तरह, दोनों परिस्थितियों में उद्धव ठाकरे का महापौर बनने का रास्ता खुला है।