बांके बिहारी मंदिर का रहस्यमयी खजाना खुला लेकिन उठा बड़ा सवाल ठाकुरजी का माल कहां गया?

Vin News Network
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54 साल बाद खुले तोषखाने में नहीं मिला ठाकुर जी का खजाना

मथुरा के प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर के तोषखाने (खजाने) को 54 वर्षों के बाद धनतेरस के दिन खोला गया लेकिन जहां लोगों को हीरे-जवाहरात और कीमती वस्तुओं की उम्मीद थी, वहां सिर्फ पीतल के बर्तन, लकड़ी का सामान और आभूषणों के खाली बॉक्स ही मिले। इससे मंदिर प्रशासन, सेवायतों और श्रद्धालुओं के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया आखिर ठाकुरजी का माल कहां गया?

उम्मीदें टूटीं, जांच की मांग तेज
हाईपावर्ड कमेटी के सदस्य दिनेश गोस्वामी ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और उच्च स्तरीय जांच की मांग की। उन्होंने कहा, खजाना तो खुल गया लेकिन खाली डिब्बे और कटे हुए कुंदे देखकर साफ लगता है कि कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर है। उन्होंने कहा कि यह मामला एक बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है और इसे अगली कमेटी मीटिंग में प्रमुखता से उठाया जाएगा।

खजाने से निकली 1970 की अमर उजाला की प्रति
खजाना खुलने के दौरान एक संदूक से अमर उजाला अखबार की 2 फरवरी 1970 की प्रति भी मिली जिसने सबको चौंका दिया। यह अखबार अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब इतना पुराना अखबार मिल सकता है तो खजाना क्यों नहीं?

दो सांप निकले, अफसर पीछे हटे
जब तोषखाना खोला गया, तो अंदर गैस निकली और दो सांप भी मिले। टीम को तत्काल पीछे हटना पड़ा। वन विभाग की टीम ने सांपों को पकड़ने के बाद तलाशी शुरू की लेकिन अब तक सिर्फ खाली संदूक, पीतल के बर्तन और लकड़ी का मंदिर ही मिले हैं।

खजाना खुला पारदर्शिता पर सवाल
कई सेवायतों ने कमेटी पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि जब लाइव स्ट्रीमिंग की बात हुई थी तो फिर खजाना खोलने की प्रक्रिया को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? जॉनी गोस्वामी ने कहा, खजाने का लाइव क्यों नहीं कराया गया? कमेटी की मनमानी से श्रद्धालु आहत हैं। रजत गोस्वामी ने आरोप लगाया कि, “तोषखाने में प्रवेश करने वालों की जेबें न चेक की गईं और न ही बाहर आते वक्त जांच हुई। यह सब पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

इतिहास में दो बार हो चुकी हैं चोरी
सेवायत दिनेश गोस्वामी ने बताया कि तोषखाने में दो बार चोरी हो चुकी है 1926 और 1936 में। माना जा रहा है कि असली खजाना इन चोरियों में गायब हो गया या फिर 1971 में सील होने से पहले ही निकाल लिया गया। उन्होंने बताया कि बुजुर्गों से सुना है कि मंदिर में एक तहखाना भी था जहां हाथी दांत की छड़ी समेत कई कीमती वस्तुएं रखी थीं, जिन्हें ग्वालियर के राजा ने भेंट किया था।

सोशल मीडिया पर चर्चा और व्यंग्य
खजाना खुलने के बाद सोशल मीडिया पर यह मुद्दा ट्रेंडिंग में रहा। कई यूजर्स ने व्यंग्य में लिखा- ये तो आराध्य की माया है, तोषखाने ने ही सब खाया! कुछ यूजर्स ने पुराने किस्से शेयर किए और सवाल उठाए कि क्या मंदिर में खजाना था ही नहीं? या सब कुछ पहले ही गायब कर दिया गया?

कमेटी का बचाव और अगली कार्रवाई
जिलाधिकारी सीपी सिंह ने बताया कि एक कमरा और दो संदूक अब भी बाकी हैं, जिन्हें रविवार को खोला जाएगा। हालांकि, लोगों की उम्मीदें अब कमजोर पड़ती दिख रही हैं। एडीएम प्रशासन पंकज कुमार ने बताया कि अब तक कोई भी कीमती वस्तु नहीं मिली है। वहीं सेवायतों का कहना है कि कमेटी को अब जवाब देना होगा।

नतीजा
खजाना खुला लेकिन माल गायब। अब सभी की निगाहें बचे हुए कमरों और संदूकों पर टिकी हैं। लेकिन सवाल तो यही है क्या वाकई कुछ मिलेगा? या यह खजाना सिर्फ इतिहास बनकर रह जाएगा?

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