समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर प्रदेश सरकार के बुलडोज़र मॉडल पर बड़ा बयान देकर राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। अखिलेश का कहना है कि सरकार ने जिस बुलडोज़र कार्रवाई को कानून-व्यवस्था की उपलब्धि के रूप में प्रचारित किया है, उसकी मार सबसे अधिक PDAपिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय पर पड़ी है। उनका आरोप है कि बुलडोज़र अभियान को न्याय का प्रतीक बताकर पेश किया गया, लेकिन जमीन पर इसका उपयोग लक्ष्यपूर्ण तरीके से उन लोगों पर किया गया जिनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति पहले से ही कमजोर है। अखिलेश ने कहा कि सरकार जिस कार्रवाई को “अपराधियों के खिलाफ निर्णायक कदम” बताती है, वह वास्तव में कई निर्दोष और गरीब परिवारों पर भारी पड़ी है।
कानून का राज बुलडोज़र से नहीं, अदालतों से चलता है
अखिलेश यादव ने मांग की कि सरकार यह साफ करे कि जिन घरों या दुकानों पर बुलडोज़र चलाया गया, उनमें से कितने मामलों में कानूनी नोटिस जारी किया गया था। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी व्यक्ति की संपत्ति पर कार्रवाई तभी हो सकती है जब पूरा न्यायिक प्रक्रिया पालन किया गया हो।
उनका कहना है कि ‘बुलडोज़र को न्याय का रास्ता बताना गलत है। न्यायालय तय करती है कि कौन दोषी है, न कि किसी राजनीतिक आदेश पर चलने वाला बुलडोज़र’। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई बार बिना जांच पूरी किए, बिना सही दस्तावेज़ों की समीक्षा किए, और बिना वैकल्पिक आश्रय की व्यवस्था किए बुलडोज़र चलाए गए। इसके कारण कई परिवार रातों-रात बेघर हो गए और उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ा।
सरकार की प्राथमिकताओं पर उठाए सवाल
सपा अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि राज्य में अपराध पर अंकुश लगाने के लिए मौजूद पुलिस व्यवस्था और कानून का उपयोग करने के बजाय सत्ता पक्ष ने बुलडोज़र को तुरंत न्याय का प्रतीक क्यों बनाया। उन्होंने कहा कि “अपराधियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन अपराध और अपराधी की परिभाषा सरकार तय नहीं कर सकती। यह काम अदालत का है। अखिलेश का कहना है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति मजबूत करने का दावा करने वाली सरकार को चाहिए कि वह अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई करे, न कि पूरे समुदायों को निशाना बनाकर उनके घर उजाड़े।
चुनिंदा कार्रवाई का आरोप
अखिलेश यादव ने बुलडोज़र अभियान को एकतरफा बताते हुए कहा कि इसका इस्तेमाल कुछ चुनिंदा तबकों तक सीमित रहा है। उनके अनुसार, जिन समुदायों की आवाज कमजोर है, जिनके पास संसाधन कम हैं, और जो प्रशासनिक अन्याय का विरोध नहीं कर पाते, उन्हीं पर बुलडोज़र सबसे अधिक चला।उन्होंने कहा कि PDA वर्ग को टारगेट किया जाना केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक अन्याय का प्रश्न है। सपा प्रमुख का आरोप है कि असली माफियाओं और बड़े अपराधियों पर जितनी तेजी और कठोरता दिखाई जानी चाहिए, उतनी कार्रवाई सरकार ने नहीं की। इसके बजाय, बुलडोज़र अधिकतर ऐसे घरों पर चला जिनकी न तो अदालत में सुनवाई हुई और न ही उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया।
सपा ने प्रभावित परिवारों को मदद का आश्वासन दिया
अखिलेश यादव ने घोषणा की कि समाजवादी पार्टी बुलडोज़र कार्रवाई से प्रभावित परिवारों को कानूनी सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के घर गिराए गए हैं, उनके मामलों की समीक्षा की जाएगी और जरूरत पड़ने पर कोर्ट में भी मदद की जाएगी। उनका कहना है कि पार्टी इस मुद्दे को विधानसभा और आगामी लोकसभा चुनावों में प्रमुख रूप से उठाएगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मुद्दा चुनावी राजनीति का नहीं, बल्कि “न्याय और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा” का है।
अखिलेश यादव के इस बयान ने एक बार फिर बुलडोज़र मॉडल पर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। जहां सरकार इसे अपराधियों पर प्रहार बताती है, वहीं विपक्ष का आरोप है कि इसका असली बोझ गरीब और वंचित तबकों ने उठाया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा किस दिशा में जाता है, यह राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहेगा।