मानव जाति एक ऐसे ऐतिहासिक पल की दहलीज पर खड़ी है, जिसका इंतजार पिछली आधी सदी से किया जा रहा था। साल 1972 के ‘अपोलो-17’ मिशन के बाद, पहली बार इंसान पृथ्वी की सुरक्षित कक्षा को छोड़कर चंद्रमा की दुर्गम यात्रा पर निकलने के लिए पूरी तरह तैयार है। नासा का बहुप्रतीक्षित आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन 1 अप्रैल 2026 को (भारतीय समयानुसार 2 अप्रैल की सुबह) लॉन्च होने जा रहा है। यह मिशन न केवल विज्ञान के लिए, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक नया सवेरा साबित होगा।
1 अप्रैल की रात शुरू होगा सफर
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, आर्टेमिस II मिशन 1 अप्रैल 2026 को रात 22:24 UTC (भारतीय समयानुसार 2 अप्रैल, सुबह 3:54 बजे) पर उड़ान भरेगा। यह मिशन चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चंद्रमा के चारों ओर एक चक्कर लगाएगा और फिर उन्हें सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाएगा। इस मिशन का उद्देश्य चंद्रमा पर स्थायी मानव उपस्थिति दर्ज करने की दिशा में पहला बड़ा कदम उठाना है।
स्पेसक्राफ्ट का लाइव ऑब्जर्वेशन: एक अनोखा अनुभव
इस मिशन की सबसे रोमांचक बात यह है कि लॉन्चिंग के मात्र 4 घंटे बाद ही दुनिया भर के खगोल प्रेमी और आम लोग इस स्पेसक्राफ्ट को अंतरिक्ष की गहराइयों में उड़ान भरते हुए देख सकेंगे। इटली के खगोलविदों की एक टीम ने घोषणा की है कि जैसे ही ‘ओरियन’ (Orion) स्पेसक्राफ्ट यूरोपीय आकाश में दृश्यमान होगा, वे इसे लाइव ट्रैक करने का प्रयास करेंगे।
खगोलविदों ने इसके लिए नासा के JPL होराइजन्स और सोलर सिस्टम डायनेमिक्स से प्राप्त सटीक डेटा का उपयोग किया है। यदि लॉन्चिंग तय समय पर सफल रहती है, तो 2 अप्रैल की तड़के लोग अपने घरों से ही ओरियन स्पेसक्राफ्ट को तारों के बीच से गुजरते हुए एक चमकीले बिंदु के रूप में देख पाएंगे।
आर्टेमिस II क्यों है बेहद खास?
आर्टेमिस II मिशन केवल एक परिक्रमा नहीं है, बल्कि यह भविष्य के ‘आर्टेमिस III’ मिशन की बुनियाद है, जिसके तहत पहली बार किसी महिला और एक अश्वेत व्यक्ति को चंद्रमा की सतह पर उतारा जाएगा। इस बार ओरियन कैप्सूल में सवार चार जांबाज अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के ‘डार्क साइड’ (दूरस्थ हिस्से) के पास से गुजरेंगे, जो पृथ्वी से कभी दिखाई नहीं देता।
यह यात्रा लगभग 10 दिनों की होगी, जिसमें अंतरिक्ष यात्री कैप्सूल के लाइफ सपोर्ट सिस्टम, संचार व्यवस्था और सुरक्षा उपकरणों का परीक्षण करेंगे। यह मिशन सफल होने पर इंसान के लिए मंगल ग्रह (Mars) तक पहुँचने का रास्ता भी साफ हो जाएगा।