दिल्ली के लाल किले में हुए धमाके के बाद जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में UAPA की धारा 16 और 18 के साथ-साथ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 3 और 4 सहित कई गंभीर धाराओं के तहत FIR दर्ज कर ली है। साथ ही भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं को भी शामिल किया गया है। यह शिकायत पुलिसकर्मी विनोद द्वारा अज्ञात आरोपियों के खिलाफ दर्ज कराई गई है। फिलहाल सुरागों की तलाश में पुलिस इलाके की सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक डेटा और संदिग्ध गतिविधियों की बारीकी से जांच कर रही है। अब तक इस धमाके में 13 लोगों की जान जा चुकी है, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।
इस घटना को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उच्च स्तरीय बैठक बुलाई, जहाँ उन्होंने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ भी चर्चा की। इसी बीच पुलिस ने मुख्य संदिग्ध डॉ. उमर नबी की गतिविधियों की मूवमेंट चेन तैयार की है, जो उसके हर कदम को योजनाबद्ध बताती है हरियाणा से निकलना, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल, ढाबे पर रुकना, मस्जिद में नमाज़ पढ़ना, और अलग-अलग स्थानों पर फोन चेक करना। 50 से अधिक CCTV फुटेज सामने आए हैं जो उसकी सोच-समझकर बनाई गई प्लानिंग की ओर संकेत करते हैं।
उधर, जांच का एक बड़ा हिस्सा कानपुर से जुड़ गया है, जहाँ यूपी ATS ने GSVM मेडिकल कॉलेज के 32 वर्षीय डॉक्टर मोहम्मद आरिफ को हिरासत में लिया है। माना जा रहा है कि यह गिरफ्तारी पूरे मॉड्यूल की संरचना को समझने में अहम साबित होगी। साथ ही फरीदाबाद में मिली रेड फोर्ड इकोस्पोर्ट कार को भी पुलिस ने घेराबंदी कर जांचा है, जिसे संदिग्धों से जुड़ा माना जा रहा है।
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया है कि इस “व्हाइट कॉलर” आतंकी नेटवर्क में शामिल चार डॉक्टरों ने लगभग 26 लाख रुपये नकद जुटाए थे, जो उमर को ऑपरेशन के लिए दिए गए थे। इसी बीच अल फलाह यूनिवर्सिटी भी जांच के दायरे में है और उस पर नैक द्वारा फर्जी दस्तावेज़ों के इस्तेमाल को लेकर नोटिस जारी किया गया है। यूनिवर्सिटी का नाम पहले ही इस मॉड्यूल से जुड़े जांच बिंदुओं में शामिल रहा है।