भारतीय शेयर बाजारों में 21 जनवरी 2026 को लगातार तीसरे दिन भारी गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 1000 अंक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी 25,000 के महत्वपूर्ण स्तर को तोड़कर नीचे चला गया। इस गिरावट के पीछे निवेशकों का भरोसा कमजोर होना और कई बाहरी एवं आंतरिक कारण शामिल हैं।
- विदेशी निवेशकों की बिकवाली
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया। विदेशी निवेशक पिछले कुछ हफ्तों से बाजार से निकल रहे हैं, जिससे स्टॉक्स की कीमतें लगातार गिर रही हैं।
- तिमाही नतीजों से मिली-जुली प्रतिक्रिया
कंपनियों के तिमाही नतीजे भी निवेशकों को संतुष्ट नहीं कर पाए। कुछ कंपनियों ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि कई ने उम्मीद से कम लाभ दर्ज किया। इससे निवेशकों में असमंजस की स्थिति पैदा हुई और शेयर बाजार में दबाव बढ़ा।
- भू-राजनीतिक चिंताएं
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती भू-राजनीतिक तनावों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच जोखिम लेने की प्रवृत्ति कम हुई, जिससे बाजार में गिरावट आई।
- सभी सेक्टोरल इंडेक्स में लाल निशान
बाजार में चौतरफा कमजोरी रही। सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी 1.5 फीसदी से अधिक लुढ़क गए, जो बाजार में समग्र दबाव को दर्शाता है।
- निवेशकों का घटता भरोसा
लगातार बिकवाली और अनिश्चित आर्थिक संकेतों के चलते निवेशकों का भरोसा डगमगाया। लोग जोखिम भरे निवेश से बचने लगे और मुनाफा बुक करने पर जोर दिया। इससे बाजार में तेजी की संभावना कम हुई।
- तकनीकी स्तरों का टूटना
निफ्टी का 25,000 के स्तर से नीचे गिरना और सेंसेक्स का 1000 अंकों का गिरना तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण संकेत हैं। तकनीकी रूप से यह मजबूत समर्थन स्तर टूटने का सूचक है, जिससे और बिकवाली को बढ़ावा मिला।
भारतीय शेयर बाजार में इस ‘महाक्रैश’ का मुख्य कारण विदेशी निवेशकों की बिकवाली, असंतोषजनक तिमाही नतीजे और बढ़ती भू-राजनीतिक चिंताएं हैं। बाजार में चौतरफा कमजोरी और तकनीकी स्तरों का टूटना निवेशकों की चिंताओं को और बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को धैर्यपूर्वक स्थिति का अवलोकन करना चाहिए और जल्दबाजी में निवेश निर्णय न लेना चाहिए।