भारतीय शेयर बाजार में आज सुबह के कारोबार में गिरावट देखने को मिली। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 400 अंकों से अधिक नीचे चला गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी 0.35% फिसल गया। विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी (outflows) और रुपये के कमजोर होने के कारण निवेशकों का मनोबल गिरा हुआ है, और इस गिरावट का एक प्रमुख कारण भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में हो रही देरी है।
सुबह 10:15 बजे, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 0.55% या 470.99 अंक गिरकर 84,739.75 अंक पर कारोबार कर रहा था। इसी समय, व्यापक आधार वाला निफ्टी 50 भी 0.50% की गिरावट के साथ 25,896.80 अंक पर था।
रुपये में ऐतिहासिक गिरावट
शेयर बाजार में गिरावट के साथ ही भारतीय रुपया भी दबाव में रहा। डॉलर के मुकाबले रुपये ने नया सर्वकालिक निचला स्तर (fresh all-time low) छू लिया, जिससे हाल की गिरावट और बढ़ गई है। रुपये का कमजोर होना आयात को महंगा बनाता है और विदेशी निवेशकों (FIIs) के लिए भारतीय संपत्ति का मूल्य कम कर देता है, जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ता है।
बाजार में नकारात्मक माहौल व्यापक रूप से दिखाई दिया, क्योंकि 16 प्रमुख क्षेत्रों में से 15 नीचे कारोबार कर रहे थे। इसके अलावा, स्मॉल-कैप (Small-caps) और मिड-कैप (Mid-caps) सेगमेंट में भी क्रमशः 0.6% और 0.4% की गिरावट दर्ज की गई।
रिकॉर्ड स्तरों से फिसला बाजार
सेंसेक्स और निफ्टी 50 ने 1 दिसंबर को अपना रिकॉर्ड उच्च स्तर (record highs) छुआ था। हालाँकि, उसके बाद से बाजार डगमगा रहा है। बाजार को अब किसी बड़े सकारात्मक उत्प्रेरक (major positive triggers) का इंतजार है। बाजार को नीचे खींचने वाले प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं:
- भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में अनिश्चितता
भारतीय शेयर बाजार के लिए भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौता एक महत्वपूर्ण उत्प्रेरक हो सकता था, लेकिन अब इसमें अनिश्चितता दिख रही है। साल के अंत से पहले समझौते की उम्मीदें धूमिल होती दिख रही हैं। सोमवार को, भारत के व्यापार सचिव ने केवल इतना कहा था कि दोनों देश एक “ढांचागत समझौते” (framework deal) के करीब हैं, लेकिन उन्होंने कोई निश्चित समय सीमा नहीं दी। पिछले सप्ताह, भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार ने भी कहा था कि एक व्यापार समझौते की संभावना मार्च तक ही बन सकती है। इस लंबे इंतजार से बाजार में निराशा छाई हुई है। - अमेरिकी नौकरियों के डेटा पर नजर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस सप्ताह जारी होने वाले अमेरिका के रोजगार डेटा (US jobs data) का भारतीय शेयर बाजार पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा पिछले सप्ताह की गई ब्याज दर कटौती (interest-rate cut) से भी अधिक महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।
पीएल कैपिटल (PL Capital) के प्रमुख सलाहकार विक्रम कसट का मानना है कि अमेरिका में कम ब्याज दरें भारत जैसे उभरते बाजारों (emerging markets) को विदेशी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाती हैं। यदि अमेरिकी नौकरियों का डेटा मजबूत रहा, तो फेडरल रिजर्व को भविष्य में दरों में कटौती करने की जल्दबाजी नहीं होगी, जिससे FIIs का प्रवाह धीमा बना रह सकता है।
- विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार निकासी
बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा और प्रत्यक्ष कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (Foreign Institutional Investors – FIIs) द्वारा की जा रही लगातार बिकवाली है। अनंतिम आंकड़ों के अनुसार, FIIs ने सोमवार को ₹1,468 करोड़ मूल्य के शेयर बेचे। यह उनकी लगातार सातवीं बिकवाली सत्र था।
दिसंबर के महीने में, FIIs ने भारतीय इक्विटी से अब तक $1.6 बिलियन की भारी निकासी कर ली है। यह निकासी पिछले दो महीनों (अक्टूबर और नवंबर) में किए गए $1.3 बिलियन के कुल निवेश को उलट देती है। केवल इक्विटी ही नहीं, FIIs ने भारतीय ऋण बाजार (local debt) से भी पैसा निकाला है, जिससे बाजार पर दोहरा दबाव पड़ रहा है।
संक्षेप में, भारतीय शेयर बाजार इस समय विदेशी निवेश की कमी, रुपये की कमजोरी और व्यापार समझौते की अनिश्चितता के चलते दबाव में है। निवेशकों को अब वैश्विक संकेतों, विशेष रूप से अमेरिकी डेटा और FIIs के प्रवाह पर करीब से नजर रखनी होगी ताकि बाजार की अगली दिशा का अनुमान लगाया जा सके।