विन न्यूज़ नेटवर्क। ठगी और जबरन वसूली के मामलों में जेल में बंद सुकेश चंद्रशेखर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। जज बनकर फोन करने और एक न्यायिक अधिकारी पर अपने पक्ष में फैसला लेने का दबाव बनाने के मामले में सुकेश को अदालत से राहत नहीं मिली।
सुप्रीम कोर्ट ने उसकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने अपनी दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाने की मांग की थी। अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2017 का है, जब सुकेश चंद्रशेखर पुलिस हिरासत में था। आरोपों के मुताबिक, उसने एक कांस्टेबल का मोबाइल फोन हासिल किया और इसके जरिए पहले सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश के निजी सचिव से संपर्क किया। इसके बाद उसने खुद को न्यायाधीश बताकर संबंधित न्यायिक अधिकारी को फोन किया। आरोप था कि उसने अपने खिलाफ चल रहे मामले में राहत और जमानत हासिल करने के लिए न्यायिक अधिकारी पर दबाव बनाने की कोशिश की।
इन धाराओं में ठहराया गया था दोषी
इस मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 20 अगस्त को सुकेश चंद्रशेखर को दोषी करार दिया था। इसके बाद 29 अगस्त को उसे सजा सुनाई गई। उसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 170, 189 और 507 के तहत दोषी ठहराया गया। ये धाराएं लोक सेवक का प्रतिरूपण करने, लोक सेवक को चोट पहुंचाने की धमकी देने और गुमनाम तरीके से आपराधिक धमकी देने से संबंधित हैं।
सेशन कोर्ट और हाईकोर्ट से भी नहीं मिली राहत
दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाने के लिए सुकेश ने पहले सेशन कोर्ट और फिर दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, दोनों अदालतों ने उसकी मांग स्वीकार नहीं की। इसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की।
उसकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट ने उसके खिलाफ पहले से दर्ज 31 आपराधिक मामलों का उल्लेख किया था, जबकि उन मामलों में उसे दोषी नहीं ठहराया गया है। बचाव पक्ष का कहना था कि ऐसी टिप्पणियों का असर अन्य मुकदमों की सुनवाई पर पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं पाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सुकेश के खिलाफ चल रहे अन्य मामलों की सुनवाई उनके अलग-अलग तथ्यों और लागू कानून के आधार पर जारी रहनी चाहिए।
वहीं, सुकेश से जुड़े जबरन वसूली के एक अन्य मामले में अभिनेत्री नोरा फतेही के अदालत में पेश नहीं होने पर राऊज एवेन्यू कोर्ट ने नाराजगी जताई थी। अदालत ने कहा था कि न्यायिक प्रक्रिया को हल्के में नहीं लिया जा सकता।