रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर से दो दिवसीय भारत दौरे पर आएंगे। इस दौरे की आधिकारिक घोषणा भारत के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को की। इस दौरान राष्ट्रपति पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह दौरा दोनों देशों के बीच मजबूत और स्थायी द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ करने तथा वैश्विक और क्षेत्रीय मामलों पर विचार साझा करने का एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस दौरे के दौरान दोनों देशों के नेतृत्व को अपने आपसी सहयोग की प्रगति की समीक्षा करने का मौका मिलेगा। साथ ही, “विशेष और प्रिविलेज्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” को और मजबूत बनाने के तरीकों पर चर्चा होगी और विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार साझा किया जाएगा।
भारत-रूस संबंधों का महत्व
भारत और रूस के बीच रणनीतिक और मित्रवत संबंध दशकों पुराने हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, विज्ञान, अंतरिक्ष और आर्थिक क्षेत्रों में सहयोग काफी मजबूत है। विशेष रूप से रक्षा क्षेत्र में रूस भारत का प्रमुख साझेदार रहा है। भारतीय सेना और वायुसेना कई महत्वपूर्ण हथियार और उपकरण रूस से प्राप्त करती हैं। इसके अलावा, परमाणु ऊर्जा, हाइड्रोपावर, इंफ्रास्ट्रक्चर और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देशों का सहयोग लगातार बढ़ रहा है। भारत और रूस के बीच उच्च स्तरीय बैठकें और वार्षिक शिखर सम्मेलन इन सहयोगों का मूल्यांकन करने और भविष्य की योजनाओं को तय करने का प्रमुख मंच है। पिछले साल भी दोनों देशों ने कई समझौतों और परियोजनाओं पर चर्चा की थी, जिन्हें इस वर्ष के सम्मेलन में समीक्षा के लिए रखा जाएगा।
दौरे का एजेंडा
- इस दौरे में कई महत्वपूर्ण विषयों पर दोनों नेता चर्चा करेंगे। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- द्विपक्षीय संबंधों का मूल्यांकन: पिछले साल हुए समझौतों और परियोजनाओं की प्रगति का आकलन और आगे की रणनीति तय करना।
- रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना: दोनों देशों की विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूती देना।
- क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श: वैश्विक सुरक्षा, आतंकवाद, क्षेत्रीय विवाद और आर्थिक स्थिति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा।
- व्यापार और निवेश: भारत और रूस के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ाने के लिए नई परियोजनाओं और सहयोग के अवसरों पर विचार करना।
पूर्व सहयोग और पृष्ठभूमि
भारत और रूस के राजनीतिक और कूटनीतिक संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं। शीत युद्ध के दौर से ही दोनों देशों ने एक-दूसरे के साथ लगातार सहयोग बनाए रखा है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों ने ऊर्जा, रक्षा, विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में कई साझा परियोजनाओं को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। विशेष रूप से रक्षा क्षेत्र में रूस ने भारतीय सैन्य शक्ति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके अतिरिक्त, परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में भी रूस की भूमिका अहम रही है।
वैश्विक और क्षेत्रीय महत्व
भारत और रूस दोनों ही वैश्विक राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस दौरे के दौरान दोनों देशों के नेताओं के बीच वैश्विक आर्थिक और सुरक्षा चुनौतियों पर भी चर्चा होगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह दौरा केवल द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सहयोग के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा।
अंततः
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का यह दो दिवसीय भारत दौरा भारत-रूस संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ने वाला है। यह दौरा द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने, वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करने और लंबे समय से चले आ रहे मित्रवत संबंधों को और गहरा करने का अवसर देगा। विदेश मंत्रालय ने इस दौरे को दोनों देशों के नेताओं के लिए वर्तमान सहयोग की समीक्षा और भविष्य की रणनीति तय करने का एक महत्वपूर्ण अवसर बताया है। इस दौरे पर वैश्विक और क्षेत्रीय नजरें भी टिकी हुई हैं, क्योंकि भारत और रूस दोनों ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इस दौरे के दौरान उम्मीद की जा रही है कि कई समझौते और परियोजनाएं सामने आएंगी, जो दोनों देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग को नई ऊँचाइयों पर ले जाएंगी।