तेहरान ईरान के भीतर नागरिक सरकार और सैन्य नेतृत्व के बीच गहराते संघर्ष की खबरें सामने आई हैं। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर अहमद वाहिदी के बीच जारी युद्ध के प्रबंधन और उसके आर्थिक परिणामों को लेकर गंभीर मतभेद उत्पन्न हो गए हैं।
रणनीति और आर्थिक स्थिरता पर विवाद
एक नरमपंथी नेता के रूप में पहचाने जाने वाले राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने IRGC की वर्तमान सैन्य कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। ‘ईरान इंटरनेशनल’ की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ने चेतावनी दी है कि क्षेत्रीय तनाव और पड़ोसी देशों पर निरंतर हमलों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पतन की कगार पर है।
पेजेश्कियान के आकलन के अनुसार, यदि युद्ध की स्थिति पर तत्काल नियंत्रण नहीं पाया गया, तो आगामी तीन से चार हफ्तों के भीतर राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो सकती है। गौरतलब है कि 7 मार्च को एक वीडियो संदेश में राष्ट्रपति ने पड़ोसी देशों से हमलों के लिए क्षमा याचना की थी और सेना को परिचालन रोकने का निर्देश दिया था, जिसे सैन्य नेतृत्व ने नजरअंदाज कर दिया।
प्रशासनिक नियंत्रण और संस्थागत टकराव
सत्ता के संतुलन को लेकर दोनों पक्षों में खींचतान जारी है:
- राष्ट्रपति की मांग: पेजेश्कियान ने मांग की है कि प्रशासनिक निर्णय लेने की पूर्ण शक्तियां पुनः निर्वाचित सरकार को सौंपी जाएं ताकि संकट का समाधान कूटनीतिक और आर्थिक स्तर पर किया जा सके।
- IRGC का रुख: कमांडर अहमद वाहिदी ने इस मांग को अस्वीकार करते हुए वर्तमान संकट का दोष सरकार के पुराने प्रबंधन पर मढ़ा है। वाहिदी का तर्क है कि युद्ध से पहले आवश्यक ढांचागत सुधार न करना इस स्थिति का मुख्य कारण है।
आर्थिक संकट और नागरिक प्रभाव
देश के भीतर आर्थिक स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। इजरायली मीडिया और स्थानीय स्रोतों के अनुसार, ईरान के वित्तीय ढांचे में स्पष्ट दरारें देखी जा रही हैं:
बैंकिंग व्यवस्था: प्रमुख शहरों में अधिकांश एटीएम निष्क्रिय हैं और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं में निरंतर व्यवधान आ रहा है।
सार्वजनिक क्षेत्र: सरकारी कर्मचारियों को पिछले तीन महीनों से वेतन और भत्ते प्राप्त नहीं हुए हैं।
मुद्रास्फीति: युद्ध से पूर्व ही आवश्यक वस्तुओं की मुद्रास्फीति दर 105% से 115% के बीच दर्ज की गई थी, जो अब और अधिक बढ़ गई है।
क्षेत्रीय विश्लेषक इन आंतरिक मतभेदों को ईरान की सत्ता संरचना में एक बड़े नीतिगत बदलाव या संभावित अस्थिरता के संकेत के रूप में देख रहे हैं।