प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बेहद महत्वपूर्ण चार दिवसीय विदेश यात्रा पर हैं। यह दौरा 15 दिसंबर से शुरू हुआ और 18 दिसंबर तक चलेगा। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य मिडिल ईस्ट (पश्चिमी एशिया) और अफ्रीका के देशों के साथ भारत के रिश्तों को नई मज़बूती देना है। PM मोदी की इस यात्रा में तीन देश शामिल हैं: जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान। यह कदम दिखाता है कि भारत अब इन क्षेत्रों में अपनी विदेश नीति और साझेदारी को कितना महत्व दे रहा है।
पहला पड़ाव: जॉर्डन, एक विश्वसनीय साथी
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी यात्रा की शुरुआत सोमवार को जॉर्डन की राजधानी अम्मान पहुंचकर की। जॉर्डन, अरब जगत में एक स्थिर और भरोसेमंद देश माना जाता है, इसलिए इसे भारत की मिडिल ईस्ट नीति में एक अहम कड़ी माना जाता है। इस दौरे को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि भारत और जॉर्डन के बीच राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे हो रहे हैं।
PM मोदी का स्वागत अम्मान हवाई अड्डे पर जॉर्डन के प्रधानमंत्री जाफर हसन ने किया। यह एक गर्मजोशी भरा स्वागत था, जो दोनों देशों के मजबूत रिश्तों को दर्शाता है। अम्मान पहुँचते ही, PM मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किया और जॉर्डन के प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूत करेगी।
जॉर्डन में पीएम मोदी का कार्यक्रम व्यस्त रहा। सबसे पहले, उन्होंने जॉर्डन में रहने वाले भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की, जो प्रवासी भारतीयों के साथ जुड़ने की उनकी परंपरा का हिस्सा है। इसके बाद, उन्होंने जॉर्डन के किंग, किंग अब्दुल्ला द्वितीय के साथ ‘वन-टू-वन’ बातचीत की। इस मुलाकात का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सहयोग के नए रास्ते तलाशना था। इसके बाद, दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल स्तर की भी बातचीत हुई।
अस्थिरता के बीच साझेदारी पर ज़ोर
PM मोदी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिमी एशिया में काफी अस्थिरता है। इस क्षेत्र में युद्ध, गाजा संकट और लाल सागर में चल रही अशांति जैसी गंभीर चुनौतियाँ मौजूद हैं। इन सबके बीच, भारत इस क्षेत्र में क्षेत्रीय संतुलन (Regional Balance) बनाए रखने और अपनी रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
मंगलवार की सुबह (16 दिसंबर) को, PM मोदी ने जॉर्डन में एक बिजनेस फोरम को संबोधित किया। इस फोरम का मुख्य फोकस निवेश (Investment) और आर्थिक सहयोग को बढ़ाना था। इसका उद्देश्य दोनों देशों के व्यापारियों और उद्योगपतियों को एक साथ लाना और व्यापार के नए अवसरों पर चर्चा करना था। आर्थिक संबंधों को मजबूत करना ही इस यात्रा का एक प्रमुख लक्ष्य है। जॉर्डन में अपना कार्यक्रम पूरा करने के बाद, PM मोदी मंगलवार दोपहर को अगले पड़ाव के लिए रवाना हो गए।
दूसरा पड़ाव: इथियोपिया में अफ्रीका से संबंध मजबूत करना
जॉर्डन से विदाई लेकर प्रधानमंत्री मोदी का काफिला इथियोपिया के लिए रवाना हुआ। PM मोदी 16 और 17 दिसंबर को इथियोपिया में रहेंगे। यह प्रधानमंत्री मोदी का इथियोपिया का पहला दौरा है, जो अफ्रीका महाद्वीप के साथ भारत के बढ़ते सहयोग को दिखाता है।
इथियोपिया में, PM मोदी ने वहाँ के प्रधानमंत्री अबी अहमद के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें कीं। इन चर्चाओं में ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) के साझा मुद्दे प्रमुख रहे। खासकर, जलवायु परिवर्तन (Climate Change), कृषि (Agriculture) और प्रौद्योगिकी (Technology) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। भारत का लक्ष्य इथियोपिया और पूरे अफ्रीका महाद्वीप के साथ अपनी आर्थिक साझेदारी को बड़े स्तर पर बढ़ाना है, जिससे दोनों पक्षों को लाभ मिल सके।
तीसरा पड़ाव: ओमान में ऊर्जा और सुरक्षा पर बातचीत
इथियोपिया का दौरा पूरा करने के बाद, प्रधानमंत्री मोदी 17 दिसंबर को खाड़ी देश ओमान के लिए रवाना होंगे। ओमान भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) और समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) के दृष्टिकोण से एक बहुत ही महत्वपूर्ण भागीदार है।
ओमान में, PM मोदी वहाँ के शासक सुल्तान हायत से मुलाकात करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस उच्च-स्तरीय बातचीत में मुख्य रूप से ऊर्जा सहयोग और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर बहुत अधिक निर्भर करता है, और ओमान इस साझेदारी में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सुरक्षा सहयोग, खासकर समुद्री मार्गों की सुरक्षा, हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए भी जरूरी है। PM मोदी 18 दिसंबर की शाम को ओमान से अपनी यह चार दिवसीय महत्वपूर्ण विदेश यात्रा पूरी करके भारत के लिए वापस रवाना हो जाएंगे।
संक्षेप में, PM मोदी का यह दौरा सिर्फ एक सामान्य यात्रा नहीं है, बल्कि यह व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और शांति जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत करने के लिए एक रणनीतिक पहल है। यह दौरा बताता है कि भारत पश्चिमी एशिया और अफ्रीका को अपनी विदेश नीति का कितना महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है।