पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब भारत पर भी साफ दिखाई देने लगा है। इसी मुद्दे पर संसद में बोलते हुए Narendra Modi ने कहा कि इस संघर्ष ने भारत के सामने भी कई बड़ी और अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार आर्थिक, सुरक्षा और मानवी तीनों स्तरों पर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
भारत के सामने कई मोर्चों पर चुनौती
लोकसभा में प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति बेहद गंभीर है और यह संकट कई हफ्तों से जारी है। इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और आम लोगों के जीवन पर पड़ रहा है। उन्होंने माना कि भारत के लिए भी हालात आसान नहीं हैं और विभिन्न क्षेत्रों में दबाव बढ़ा है।
खाड़ी में भारतीयों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता
प्रधानमंत्री के अनुसार युद्धग्रस्त क्षेत्र वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख केंद्र है। खाड़ी देशों में लगभग 1 करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
3.75 लाख भारतीयों की सुरक्षित वापसी
सरकार ने अब तक 3.75 लाख से अधिक भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने का अभियान पूरा किया है। इनमें Iran से निकाले गए करीब 1,000 लोग भी शामिल हैं, जिनमें 700 से ज्यादा मेडिकल छात्र बताए गए। कुछ लोगों के घायल होने और मौत की खबरों का भी उल्लेख किया गया।
पेट्रोल-डीजल सप्लाई पर सरकार की रणनीति
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल, गैस और उर्वरकों का आयात होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते से होता है, जो इस समय संवेदनशील बना हुआ है। ऐसे में पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति बनाए रखने के लिए विशेष रणनीति लागू की गई है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है, इसलिए घरेलू खपत को प्राथमिकता देते हुए उत्पादन बढ़ाया जा रहा है।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़े कदम
ऊर्जा संकट से निपटने के लिए भारत ने आयात स्रोतों में विविधता बढ़ाई है। पहले जहां 27 देशों से ऊर्जा आयात होती थी, अब यह संख्या बढ़कर 41 देशों तक पहुंच गई है। देश के पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक तेल का रणनीतिक भंडार भी मौजूद है।
इथेनॉल मिश्रण और रेलवे विद्युतीकरण से राहत
सरकार के अनुसार पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण की नीति से आयातित ईंधन पर निर्भरता कम हुई है। इसके अलावा रेलवे के बड़े पैमाने पर विद्युतीकरण से भी डीजल की खपत में कमी आई है, जिससे ऊर्जा दबाव घटा है।
खेती और खाद आपूर्ति पर भी नजर
प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध का असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ सकता है, लेकिन देश में पर्याप्त खाद्यान्न भंडार उपलब्ध है। किसानों के लिए उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु छह नए यूरिया संयंत्र शुरू किए गए हैं।
हर स्थिति से निपटने को तैयार भारत
प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि भारत अपने वैश्विक साझेदारों के साथ लगातार संपर्क में है ताकि समुद्री मार्ग सुरक्षित बने रहें। उन्होंने कहा कि देश इस संकट का मजबूती से सामना करेगा और अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए हर आवश्यक कदम उठाया जाएगा।