‘मिशन उजाला’ दीपावली पर रोशनी नहीं उम्मीद और आत्मनिर्भरता भी बाँट रहा है यह जन-आंदोलन

Vin News Network
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मिशन उजाला की एक झलक।
Highlights
  • यह पहल प्रधानमंत्री के 'वोकल फॉर लोकल' आह्वान से प्रेरित है।
  • मिशन शक्ति की महिलाएं, मिशन ध्रुव के छात्र और स्थानीय कुम्हार इसमें सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं।
  • अभियान का मकसद सिर्फ घरों को रोशन करना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाना भी है।

लखनऊ। भारत की आत्मा उसकी परंपराओं, उसके लोगों और उनके अथक परिश्रम में बसती है। हर त्योहार सिर्फ रोशनी और रंगों का उत्सव नहीं होता बल्कि यह हमारे समाज के उन अनदेखे चेहरों के जीवन में भी रोशनी लाने का अवसर होता है जो आमतौर पर अंधेरे में रह जाते हैं।

मिशन उजाला
हर घर रौशन इसी सोच से प्रेरित एक जन-आंदोलन है जो दीपावली के अवसर पर वंचित वर्ग की महिलाओं, ग्रामीण कुम्हारों और विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए हस्तनिर्मित दीयों को आपके घरों तक पहुँचाने का प्रयास करता है। हमारा उद्देश्य केवल आपके घरों को रौशन करना नहीं बल्कि प्रेम, परिश्रम और परंपरा से जुड़े हर दीप को सामाजिक बदलाव का माध्यम बनाना है।

वोकल फॉर लोकल
संकल्प से सिद्धि की ओर प्रधानमंत्री जी के आह्वान ‘वोकल फॉर लोकल’ के तहत हम सबका यह कर्तव्य बनता है कि हम अपने स्थानीय उत्पादों को अपनाएँ उनके पीछे छिपी मेहनत को पहचानें और स्वदेशी उत्पादों के माध्यम से एक मजबूत अर्थव्यवस्था की नींव रखें।

‘मिशन उजाला’ के अंतर्गत जो दीये आपके पास पहुँचते हैं वे किसी बड़े कारखाने की मशीनों से नहीं बने होते। ये दीये तैयार होते हैं मिशन शक्ति की उन नारीशक्तियों के हाथों से जो आत्मनिर्भरता की राह पर चल पड़ी हैं मिशन ध्रुव के उन छात्र-छात्राओं द्वारा जो शिक्षा के साथ-साथ समाजसेवा में भी आगे हैं और हमारे स्थानीय कुम्हार भाई-बहनों द्वारा जिनकी पीढ़ियों से चली आ रही कला आज फिर से सम्मान पा रही है। इन दीयों को खरीदकर आप न सिर्फ एक मिट्टी का दीपक लेते हैं बल्कि उन हाथों की मेहनत, उम्मीद और आत्मसम्मान को भी रोशन करते हैं।

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