कक्षा 1 में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 6 साल तय करने वाले राष्ट्रीय निर्देशों के बावजूद 6 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश अभी तक इस नियम को लागू नहीं कर पाए हैं। इनमें तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल, छत्तीसगढ़ और पुदुचेरी शामिल हैं। वहीं, देश के 30 अन्य राज्य और केंद्रशासित प्रदेश पहले ही अपनी प्रवेश नीति को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और बाल अधिकार कानून (RTE Act 2009) के अनुरूप बदल चुके हैं।
सूत्रों के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय ने 2023 में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि अब कक्षा 1 में केवल 6 साल या उससे अधिक उम्र के बच्चे को प्रवेश दिया जाए। इससे पहले अधिकांश राज्यों में यह सीमा 5 साल से अधिक थी। मंत्रालय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि बच्चे शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक रूप से तैयार होने पर ही कक्षा 1 में प्रवेश लें।
सूत्रों की माने तो “नीति बिल्कुल स्पष्ट है। कक्षा 1 में प्रवेश 6 साल की आयु में ही होना चाहिए और सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को अपनी प्रवेश मानदंडों को इसके अनुसार संशोधित करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, अब तक केवल 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने यह नियम लागू किया है। बाकी तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पुदुचेरी, केरल और छत्तीसगढ़ अब भी पुराने आयु मानदंड का पालन कर रहे हैं।”
विशेषज्ञों का कहना है कि न्यूनतम आयु नियम का पालन न करना बच्चों के शैक्षणिक विकास और तैयारी पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इससे बच्चे जल्दी पढ़ाई शुरू करने के दबाव में आ सकते हैं, और उनकी मानसिक और शारीरिक विकास प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
शिक्षा मंत्रालय ने राज्य सरकारों से कहा है कि आगे कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और सभी को निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना होगा। अधिकारियों का मानना है कि पूरे देश में समान मानदंड लागू होने से शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों की तैयारियों में समानता सुनिश्चित होगी।
इस बीच, माता-पिता और शिक्षाविदों का कहना है कि नियम का सही समय पर पालन न होने से बच्चों की शिक्षा में असमानता और तैयारी में अंतर बढ़ सकता है। इसलिए, जल्द से जल्द सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा नियम लागू करना जरूरी है।