प्रमुख मायावती ने सोमवार को बड़ा एक्शन लेते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई मंडलों के कोऑर्डिनेटर रहे विक्रम सिंह जाटव को पार्टी से निष्कासित कर दिया। विक्रम सिंह पर आरोप है कि उन्होंने मायावती को अंधेरे में रखते हुए दो कुख्यात अपराधियों की उनसे मुलाकात कराई और उन्हें बसपा की सदस्यता भी दिला दी। यह मामला ‘दैनिक भास्कर’ में प्रमुखता से प्रकाशित हुआ था, जिसके बाद मायावती तक इसकी जानकारी पहुंची और उन्होंने तत्काल कार्रवाई करते हुए विक्रम सिंह को बाहर का रास्ता दिखा दिया।
56 FIR वाले अपराधी को दिलाई थी सदस्यता
मामले की जड़ में है मेरठ का कुख्यात अपराधी वसीम मुन्ने। मुंडाली थाना क्षेत्र के साफियाबाद लोटी गांव का रहने वाला वसीम मुन्ने पुलिस रिकॉर्ड में एक शातिर अपराधी है। उसके खिलाफ गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, दिल्ली, हापुड़ और मेरठ सहित कई जिलों में 56 FIR दर्ज हैं। इनमें चोरी, लूट, डकैती, धोखाधड़ी और बलवा जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि उसके खिलाफ पहला मुकदमा 2007 में दर्ज हुआ था जब मायावती खुद उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री थीं।
इसी तरह विक्रम सिंह ने मेरठ के रोहटा थाना क्षेत्र के भदौड़ा निवासी सुशील फौजी को भी बसपा में शामिल कराया। सुशील फौजी पुलिस रिकॉर्ड में हिस्ट्रीशीटर और गैंगस्टर दर्ज है। उसके खिलाफ हत्या, बलवा समेत करीब 12 मुकदमे दर्ज हैं और वह अपने गैंग के साथ लूट, रंगदारी और धमकी के जरिए इलाके में दहशत फैलाने के लिए कुख्यात है।
जिला पंचायत चुनाव की थी डील
सूत्रों के अनुसार दोनों अपराधी बसपा से जिला पंचायत चुनाव लड़ना चाहते थे और इसके लिए विक्रम सिंह से उनकी डील भी हुई थी। 22 जनवरी को विक्रम सिंह ने मायावती को बिना बताए दोनों की उनसे मुलाकात कराई और बसपा की सदस्यता भी दिलवा दी। मेरठ संगठन के कुछ नेताओं ने उस समय आपत्ति जताई थी, लेकिन विक्रम सिंह के प्रभाव के कारण कोई खुलकर सामने नहीं आ सका।
जब यह खबर अखबार में छपी तो मामले को दबाने के लिए आनन-फानन में दोनों अपराधियों को पार्टी से अलग कर दिया गया। कोशिश हुई कि बात मायावती तक न पहुंचे लेकिन सोमवार को उन्हें पूरी जानकारी मिल गई और उन्होंने विक्रम सिंह को पार्टी से बाहर निकाल दिया।
पहले भी मिल चुकी थी नसीहत
यह पहला मौका नहीं था जब विक्रम सिंह की इस तरह की हरकत सामने आई हो। इससे पहले वे रेप केस में सह-आरोपी रही भाजपा नेत्री मीनाक्षी सिंह को भी बसपा में शामिल करा चुके थे। उस मामले में मायावती ने विक्रम सिंह को कड़ी नसीहत दी थी। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपनी हरकतें नहीं बदलीं और दो अपराधियों को पार्टी में घुसाकर अपनी कुर्सी गंवा ली।
पश्चिमी यूपी में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल
निष्कासन के साथ-साथ मायावती ने पश्चिमी यूपी में संगठनात्मक बदलाव भी किए। सूरज सिंह जाटव को आगरा और अलीगढ़ मंडल का, जाफर मलिक को लखनऊ मंडल का और मुनकाद अली को मेरठ, मुरादाबाद और बरेली मंडलों का कोऑर्डिनेटर नियुक्त किया गया है। इससे पहले अलीगढ़ में बसपा के एक कार्यक्रम में अपेक्षित भीड़ न जुटने को लेकर भी मायावती अपनी नाराजगी जता चुकी थीं।