भारत और अमेरिका के बीच लंबित ट्रेड डील पर आखिरकार सकारात्मक माहौल बनता दिख रहा है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने संकेत दिया है कि दोनों देश उस व्यापार समझौते के बेहद करीब पहुँच चुके हैं, जो पारस्परिक शुल्क, तेल शुल्क और बाजार पहुंच से जुड़े अहम मुद्दों का हल प्रदान करेगा। दोनों देशों का लक्ष्य है कि 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा स्तर से बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाए।
कई महीनों की चुप्पी के बाद वार्ता में आई तेजी
काफी समय से India US Trade Deal को लेकर कोई ठोस अपडेट न आने के कारण यह कयास लगाए जा रहे थे कि बातचीत ठहर गई है, लेकिन वाणिज्य सचिव के बयान ने स्पष्ट कर दिया कि वार्ता लगातार वर्चुअल माध्यम से जारी थी और अब निर्णायक मोड़ पर है। उनका कहना है कि दोनों देश एक ऐसे पैकेज पर चर्चा कर रहे हैं जिसमें अमेरिकी बाजार तक भारतीय उत्पादों की बेहतर पहुंच, 25% पारस्परिक शुल्क और अतिरिक्त 25% तेल शुल्क जैसे संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं।
डील के दो हिस्से टैरिफ समाधान व लंबी अवधि का ढांचा
राजेश अग्रवाल के अनुसार प्रस्तावित डील दो हिस्सों में विभाजित है। पहला भाग टैरिफ और शुल्क संबंधी समस्याओं के समाधान पर केंद्रित है, जबकि दूसरा हिस्सा दीर्घकालिक व्यापारिक तालमेल को मजबूत करने पर आधारित है। उनका कहना है कि कुछ मुद्दों पर सहमति में समय लग सकता है, परंतु समग्र रूप से चर्चा तेजी से आगे बढ़ रही है।
500 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम
भारत और अमेरिका के शीर्ष नेतृत्व ने फरवरी में इस डील के लिए औपचारिक खाका तैयार किया था। यह वही लक्ष्य है जिसका उल्लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाशिंगटन यात्रा के दौरान हुआ था द्विपक्षीय व्यापार को 191 अरब डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक 500 अरब डॉलर तक पहुँचाना। सरकारी अधिकारियों के अनुसार हाल के हफ्तों में बातचीत और अधिक सक्रिय हुई है और यह समझौता WTO नियमों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।
भारत – अमेरिका LPG समझौता बना बड़ी उपलब्धि
इसी बीच ऊर्जा क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण डील पूरी हो चुकी है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि भारत की सार्वजनिक तेल कंपनियों ने वर्ष 2026 के लिए अमेरिकी गल्फ कोस्ट से 2.2 मिलियन टन प्रति वर्ष LPG आयात करने का एक संरचित अनुबंध पूरा कर लिया है। यह भारत के कुल LPG आयात का लगभग 10% हिस्सा होगा और अमेरिकी बाजार से इस प्रकार का यह पहला बड़ा अनुबंध है। मंत्री ने इसे भारत-अमेरिका ऊर्जा सहयोग का ऐतिहासिक कदम बताया।