फिरोजाबाद : बिहार की मतदाता सूची में विसंगतियों के कांग्रेस पार्टी और विपक्षी राजनीतिक दलों के आरोपों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, कानून के अनुसार हर चुनाव से पहले मतदाता सूची को अपडेट करना आवश्यक होता है। लगभग हर राजनीतिक दल ने मतदाता सूची के अशुद्ध होने की शिकायत की और कहा कि मतदाता सूची को शुद्ध करना है। इस बार बिहार में जुलाई से अगस्त के बीच मतगणना फॉर्म बांटे जाएंगे और वापस भी लिए जाएंगे। सभी राजनीतिक पार्टियां इसमें सहयोग कर रही हैं, 1 लाख से अधिक बूथ-स्तरीय अधिकारी इस पर काम कर रहे हैं। मतगणना सूची सभी लोगों के सामने पूरी पारदर्शिता के साथ बनाई जाएगी।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर कहा, इसे सिर्फ राजनीतिक विषय ना बनाया जाए। यह शुद्धिकरण की एक ऐसी प्रक्रिया है जिसका समय-समय पर पालन करना जरूरी है। इस बात को सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सही मतदाताओं को ही मतदान का अधिकार मिले।इस प्रक्रिया को जितना हो सके उतना सरल बनाने का प्रयास किया गया है। यदि कोई व्यक्ति गांव में रह रहा है, आस-पड़ोस के लोग उसे पहचान रहे हैं तो इसमें(पुनरीक्षण) कैसे कठिनाई होगी? आज जब हम घुसपैठियों को लेकर इतने चिंतित हैं, तो हमें धीरे-धीरे इस प्रक्रिया को अपनाना होगा। मैं मानता हूं कि यह प्रक्रिया पारदर्शी है और आज नहीं तो कल इसे अपनाया ही जाना था।
भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा, वोटर लिस्ट के संशोधन में पात्र मतदाताओं को कोई समस्या आने वाली नहीं है। जो बांग्लादेशी हैं, उन्हें जरूर परेशान होना चाहिए। राजद और कांग्रेस की आदत बन गई है जब जीत जाएंगे तो चुनाव आयोग बहुत अच्छा है और जब हार जाएंगे तब चुनाव आयोग खराब है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि बिहार में वोटर लिस्ट के संशोधन पर सवाल उठाया जा रहा है। विपक्ष के नेताओं को ऐसी हरकत नहीं करनी चाहिए।
कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर कहा, बिहार में हो रहे पुनरीक्षण पर INDIA गठबंधन की चिंता बहुत स्पष्ट है। महाराष्ट्र में भी ऐसा ही हुआ था। हम सिर्फ पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, खास तौर पर मतदाता सूची में। चुनाव आयोग द्वारा चुनाव प्रक्रिया पर सफाई देने में क्या बुराई है? आखिरकार यह एक लोकतांत्रिक देश है और लोकतंत्र में प्रक्रिया को खुले तौर पर रखा जाना चाहिए।
RJD नेता तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग से मिलने के बाद कहा, हमें संदेह है कि मतदाताओं के नाम पहले वोटर लिस्ट से, फिर राशन लिस्ट से और फिर पेंशन लिस्ट से हटाए जाएंगे। हमने चुनाव आयोग के सामने कई सवाल उठाए हैं। अभी भी बारिश हो रही है, कई जगहों पर जलभराव है, मानसून है, हमने टाइमिंग को लेकर सवाल उठाए हैं कि 25 दिनों में ये संभव नहीं है… बाहर रहने वाले 4-5 करोड़ बिहारियों के लिए आप क्या करेंगे? हमने चुनाव आयोग से मांग की है कि दस्तावेजों को और सरल बनाया जाए, आधार कार्ड, जॉब कार्ड, मनरेगा कार्ड शामिल करें, जो दस्तावेज मांगे गए हैं वो बिहारियों के पास नहीं हैं… इस बार उन्होंने दस्तावेजों से आधार कार्ड हटा दिया है, हमने मांग की है कि इसे शामिल करें… बिहार के चुनाव आयोग को कोई भी निर्णय लेने का अधिकार नहीं है… निर्णय लेने का अधिकार दिल्ली वालो को है और हम सब जानते हैं कि उनके निर्णय कौन ले रहा है।
बता दें कि निर्वाचन आयोग ने बिहार की 2003 की मतदाता सूची जारी कर दी है। इसमें 4.96 करोड़ मतदाता शामिल हैं। इसके माध्यम से राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण को सरल बनाया जाएगा। आयोग के अनुसार सभी बूथ लेवल अधिकारियों को मतदाता सूची हार्ड कॉपी और ऑनलाइन दोनों प्रारूपों में प्राप्त होगी। इस मतदाता सूची में लगभग 5 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल हैं। आयोग ने कहा कि मतदाताओं को केवल मतदाता सूची से अपने विवरण को सत्यापित करना होगा और भरा हुआ गणना फॉर्म जमा करना होगा। उधर, विपक्षी दलों ने राज्य में विधानसभा चुनाव के 3 महीने पहले इस तरह के विशेष अभियान की आलोचना की।
नेता प्रतिपक्ष, बिहार विधानसभा तेजस्वी यादव ने कहा, विशेष गहन पुनरीक्षण के नाम पर भाजपा विपक्षी दलों के विरुद्ध एक षड्यंत्र रच रही है जिसके द्वारा लोकतंत्र की जननी बिहार के गरीबों, दलितों, पिछड़ों, श्रमिकों और वंचितों का नाम मतदाता सूची से हटाया जाएगा ताकि महाराष्ट्र की तरह विपक्ष की सांझा ताकत को कमजोर किया जा सके लेकिन हम ऐसा होने नहीं देंगे।
राज्य में लगभग 1.5 करोड़ घरों में बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) का पहला दौरा आज पूरा हो गया है और बिहार में 24 जून 2025 तक नामांकित कुल 7,89,69,844 (लगभग 7.90 करोड़) मतदाताओं में से 87 प्रतिशत से अधिक गणना फॉर्म (यानी 6,86,17,932) राज्य में आयोजित विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभ्यास के दौरान वितरित किए जा चुके हैं। शेष घर बंद हो सकते हैं, या मृत मतदाता हो सकते हैं, या प्रवासी हो सकते हैं या फिर यात्रा पर गए मतदाता हो सकते हैं। चूंकि, इस प्रक्रिया के दौरान बीएलओ तीन बार मतदाताओं के घरों का दौरा करेंगे, इसलिए इन आंकड़ों में और वृद्धि होने की संभावना है।
आंशिक रूप से भरे गए फॉर्म ईसीआई पोर्टल ( https://voters.eci.gov.in ) के साथ ECINET ऐप पर भी डाउनलोड के लिए उपलब्ध हैं और भरे हुए फॉर्म को मतदाता स्वयं ECINET ऐप पर अपलोड कर सकते हैं।
इसके अलावा, विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त 1,54,977 बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) भी एसआईआर प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग प्रदान कर रहे हैं। 2 जुलाई तक, भाजपा ने 52,689 बीएलए नियुक्त किए हैं, इसकेबाद राजद ने 47,504, जेडी(यू) ने 34,669, कांग्रेस ने 16,500, राष्ट्रीय लोक जन शक्ति पार्टी ने 1913, सीपीआई(एमएलएल ने 1271, लोक जन शक्ति पार्टी (रामविलास) ने 1153, सीपीआई(एम) ने 578, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ने 270 के अलावा बीएसपी (74), एनपीपी (3) और एएएपी (1) जैसे अन्य दल हैं। प्रत्येक बीएलए प्रतिदिन 50 प्रमाणित फॉर्म जमा कर सकता है।
लगभग पाँच प्रतिशत भरे हुए और हस्ताक्षरित फॉर्म यानी लगभग 38 लाख फॉर्म पहले ही बी.एल.ओ. को प्राप्त हो चुके हैं, जो एकमात्र आदर्श वाक्य – समावेशन सर्वप्रथम, जिस पर आयोग द्वारा बार बार जोर दिया गया है, के साथ ईमानदारी से काम कर रहे हैं। एस.आई.आर. के अनुसार,1 अगस्त 2025 को प्रकाशित होने वाली ड्राफ्ट मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए, मतदाता के लिए सख्त शर्त यह है कि वह 25 जुलाई 2025 से पहले पहले से मुद्रित गणना फॉर्म पर हस्ताक्षर करके उसे जमा कर दे। अपलोड किए गए फॉर्म का एक साथ सत्यापन भी शुरू कर दिया गया है। कुछ लोगों की आशंकाओं के बावजूद, एस.आई.आर. यह सुनिश्चित करेगा कि सभी पात्र व्यक्तियों को इसमें शामिल किया जाए।
हस्ताक्षरित गणना प्रपत्र के साथ संलग्न अथवा असंलग्न दस्तावेजों के आधार पर, ड्राफ्ट रोल में शामिल प्रत्येक नाम की पात्रता का सत्यापन उनकी प्राप्ति के पश्चात निरंतर किया जाएगा।ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन के पश्चात 02 अगस्त 2025 से सत्यापन का कार्य तीव्रता से प्रारंभ होगा। प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची के आधार पर 2 अगस्त 2025 के पश्चात किसी भी राजनीतिक दल अथवा किसी भी आम नागरिक से दावे एवं आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर,2025 को प्रकाशित की जाएगी, इसके बाद डीएम और सीईओ के पास अपील भी दायर की जा सकेगी।