कर्नाटक सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए नई ड्राफ्ट पॉलिसी जारी की है। इस नीति का मुख्य लक्ष्य बच्चों के दैनिक स्क्रीन टाइम को सिर्फ 1 घंटे तक सीमित रखना है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह कदम डिजिटल लत को रोकने, पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने और बच्चों की नींद की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से उठाया गया है। शाम 7 बजे के बाद इंटरनेट का उपयोग पूरी तरह बंद करने की सिफारिश भी की गई है, ताकि बच्चे रात में मोबाइल या कंप्यूटर से दूर रहें।
आज के दौर में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया ने बच्चों की जिंदगी पर कब्जा जमा लिया है। सर्वे बताते हैं कि औसतन किशोर 4-5 घंटे रोजाना स्क्रीन पर बिताते हैं, जिससे एकाग्रता कम होती है, आंखों की रोशनी प्रभावित होती है और नींद के चक्र में गड़बड़ी आती है। कर्नाटक शिक्षा विभाग ने इस समस्या को गंभीरता से लिया है। पॉलिसी में स्पष्ट निर्देश हैं कि शैक्षणिक उद्देश्य के अलावा मनोरंजन के लिए स्क्रीन टाइम 60 मिनट से अधिक नहीं होना चाहिए। अभिभावकों को बच्चों के डिवाइस पर पैरेंटल कंट्रोल लगाने और समय-समय पर निगरानी रखने की सलाह दी गई है।
यह नीति अभी ड्राफ्ट स्टेज में है, इसलिए सरकार ने अभिभावकों, शिक्षकों और विशेषज्ञों से सुझाव मांगे हैं। 15 दिनों के अंदर फीडबैक जमा करने का समय दिया गया है। यदि लागू हुई, तो यह पूरे देश के लिए मिसाल बनेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छात्रों की शारीरिक और मानसिक सेहत में सुधार होगा। उदाहरण के तौर पर, अमेरिका और यूरोप के कुछ देशों में इसी तरह की पॉलिसी से बच्चों की पढ़ाई में 20-30% सुधार देखा गया है।
कर्नाटक के शिक्षा मंत्री ने कहा, “हमारा उद्देश्य बच्चों को डिजिटल दुनिया के चक्रव्यूह से बचाना है, ताकि वे वास्तविक दुनिया में सफल बनें।” अभिभावक संगठनों ने इसका स्वागत किया है, लेकिन कुछ ने कार्यान्वयन की चुनौतियों पर सवाल उठाए हैं। जैसे, ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की कमी कैसे पूरी होगी? फिर भी, यह नीति बच्चों के भविष्य के लिए एक सकारात्मक पहल है।
क्या यह नीति सफल होगी? आने वाले दिनों में पता चलेगा। माता-पिता खुद से शुरुआत करें बच्चों के साथ किताबें पढ़ें, खेलें और स्क्रीन को सीमित रखें। स्वस्थ पीढ़ी ही देश का भविष्य है.