कर्नाटक की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से चल रही हलचल मंगलवार को और बढ़ गई, जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार दूसरी बार नाश्ते पर मिले। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब राज्य में सत्ता परिवर्तन, नेतृत्व बदलाव और कांग्रेस विधायकों में असंतोष से जुड़ी कई अफवाहें लगातार राजनीतिक माहौल को गर्म कर रही थीं। दोनों नेताओं की बैठक और उसके बाद का बयान आज की राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बैठक खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मीडिया से बात की और साफ कहा कि कर्नाटक का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका अंतिम फैसला कांग्रेस हाई कमांड ही करेगा। उन्होंने यह भी दोहराया कि पार्टी के सभी विधायक एकजुट हैं और किसी भी राजनीतिक संकट का सामना मिलकर करेंगे। सिद्धारमैया ने कहा, “हम सब कांग्रेस हाई कमांड के फैसले को मानते हैं। शिवकुमार तभी मुख्यमंत्री बनेंगे जब दिल्ली में हमारे नेता यह फैसला करेंगे। हमारे बीच किसी तरह का विवाद नहीं है।”
यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में काफी समय से यह चर्चा चल रही थी कि डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद की अदला-बदली चाहते हैं, जिसे कथित रूप से कांग्रेस ने 2023 चुनाव के बाद हुए समझौते में शामिल किया था। हालांकि, शिवकुमार ने आज फिर कहा कि वे पार्टी के प्रति समर्पित हैं और हाई कमांड का कोई भी निर्णय स्वीकार करेंगे। उन्होंने कहा, “मैं अपनी सीमाएँ जानता हूँ। पार्टी ने मुझे जो जिम्मेदारी दी है, मैं उसे पूरी निष्ठा के साथ निभा रहा हूँ। हाई कमांड जो भी फैसला करेगा, वही अंतिम होगा।”
इस मुलाकात से पहले विपक्ष लगातार यह दावा कर रहा था कि कर्नाटक कांग्रेस में बड़ी फूट है और कई विधायक असंतुष्ट हैं। कुछ विधायकों ने दिल्ली जाकर हाई कमांड से मिलने की इच्छा भी जताई थी। लेकिन आज की बैठक के बाद सिद्धारमैया और शिवकुमार ने संयुक्त रूप से यह संदेश दिया कि कांग्रेस सरकार स्थिर है और विधायक दल में कोई असंतोष नहीं है। सिद्धारमैया ने कहा, “हम सब एकजुट हैं और विपक्ष द्वारा लाए जा रहे अविश्वास प्रस्ताव का कड़ा जवाब देंगे। हमारी सरकार पांच साल पूरे करेगी।”
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह बयान न केवल कांग्रेस नेतृत्व की रणनीति का हिस्सा है बल्कि आने वाले समय में होने वाले संगठनात्मक बदलावों की ओर भी संकेत करता है। कांग्रेस अपने राज्य सरकारों में स्थिरता बनाए रखना चाहती है, क्योंकि देश में 2029 के आम चुनावों से पहले पार्टी को मजबूत राज्यों की जरूरत होगी। कर्नाटक दक्षिण भारत में कांग्रेस के सबसे मजबूत गढ़ों में से एक है, इसलिए यहां किसी भी तरह की उथल-पुथल पार्टी के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
आज की बैठक “ब्रेकफास्ट मीटिंग 2.0” इसलिए कही जा रही है क्योंकि विधायक दल में तनाव की खबरों के बीच कुछ दिन पहले दोनों नेता पहली बार मिले थे। उस समय भी उन्होंने कहा था कि सरकार पूरी तरह स्थिर है। लेकिन राजनीतिक माहौल शांत नहीं हुआ, जिसके बाद आज की बैठक को काफी अहम माना गया।
इस मुलाकात के बाद सरकार ने संकेत दिया है कि वह पूरी तरह विकास योजनाओं, बजट की तैयारी और विधानसभा सत्र पर ध्यान केंद्रित करेगी। सरकार का कहना है कि विपक्ष केवल भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है और कांग्रेस को अस्थिर दिखाने की राजनीति कर रहा है। सिद्धारमैया ने कहा, “विपक्ष को लगता है कि अफवाहें फैलाकर सरकार गिराई जा सकती है, लेकिन कांग्रेस परिपक्व पार्टी है और ऐसे दबाव में नहीं आने वाली।”
इसके साथ ही डीके शिवकुमार ने भी साफ कहा कि वे और सिद्धारमैया साथ-साथ काम कर रहे हैं और आने वाले चुनावों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। शिवकुमार ने कहा, “सिद्धारमैया मेरे बड़े भाई जैसे हैं। हमारे बीच किसी तरह का मतभेद नहीं है। हम दोनों मिलकर सरकार चला रहे हैं।”
कांग्रेस हाई कमांड इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में नेतृत्व को किसी भी प्रकार की अस्थिरता से बचने के लिए दोनों नेताओं को संदेश दिया गया है कि वे एकजुट होकर काम करें। यही कारण है कि दोनों नेताओं ने आज एक संयुक्त और स्पष्ट संदेश दिया, ताकि पार्टी और सरकार दोनों में स्थिरता बनी रहे।
आज की बैठक और उसके बाद आए बयानों ने यह साफ कर दिया है कि कर्नाटक में फिलहाल सत्ता परिवर्तन की कोई संभावना नहीं है। मुख्यमंत्री पद को लेकर जो भी निर्णय होगा, वह केवल हाई कमांड करेगा, और दोनों शीर्ष नेता उसके अनुसार चलेंगे। राज्य की कांग्रेस सरकार फिलहाल यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि वह मजबूत है, एकजुट है और आने वाले वर्षों में अपनी नीतियों को लागू करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।