कानपुर की वीआईपी सड़कों पर हुई लैंबॉर्गिनी हिट एंड रन की घटना अब सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं रही, बल्कि यह कानून, रसूख और सच्चाई के टकराव की बड़ी मिसाल बनती जा रही है। करीब 10 करोड़ रुपये की इटालियन लग्ज़री स्पोर्ट्स कार से छह लोगों को कुचलने के आरोप में घिरे तंबाकू कारोबारी के बेटे शिवम मिश्रा के मामले में हर दिन नए दावे और नए सवाल सामने आ रहे हैं।
सोमवार को मामले में उस वक्त नया मोड़ आ गया, जब आरोपी शिवम मिश्रा के वकील ने अदालत और मीडिया के सामने चौंकाने वाली दलील पेश की। बचाव पक्ष का दावा है कि हादसे के वक्त कार शिवम नहीं, बल्कि उसका ड्राइवर मोहन चला रहा था। इतना ही नहीं, वकील ने यह भी कहा कि शिवम मिश्रा मिर्गी (एपिलेप्सी) का मरीज है और घटना के समय उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी।
हालांकि, ये दलीलें सीसीटीवी फुटेज के सामने टिकती नजर नहीं आ रहीं। सामने आए वीडियो में साफ दिख रहा है कि एक्सीडेंट के तुरंत बाद एक बाउंसर ड्राइविंग सीट से शिवम मिश्रा को बाहर निकालता है। यही फुटेज पुलिस और बचाव पक्ष की कहानी पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।
हादसा, हंगामा और लापरवाही
यह हादसा रविवार दोपहर करीब सवा तीन बजे कानपुर के ग्वालटोली थाना क्षेत्र स्थित वीआईपी मार्ग पर हुआ। तेज रफ्तार लैंबॉर्गिनी ने पहले कई वाहनों को टक्कर मारी और फिर सड़क पर मौजूद लोगों को कुचल दिया। इस दर्दनाक घटना में कम से कम छह लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। मौके पर अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया।
आरोप है कि हादसे के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचने और तत्काल कार्रवाई करने में गंभीर लापरवाही बरती। इस पर उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी अरविंद जैन ने भी सवाल उठाए हैं। न्यूज़ 18 इंडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि शिवम मिश्रा का तुरंत मेडिकल परीक्षण कराया जाना चाहिए था। अगर पुलिस अधिकारी समय पर मौके पर पहुंचते और तथ्यों की सही जांच करते, तो स्थिति कहीं ज्यादा स्पष्ट होती।
लापरवाही के आरोपों के चलते पुलिस कमिश्नर ने ग्वालटोली थाना प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया है। यह कार्रवाई भले ही प्रशासनिक स्तर पर की गई हो, लेकिन इससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि क्या शुरुआती जांच में रसूख का दबाव हावी रहा।
ड्राइवर और बीमारी: पुराना बचाव, नई कहानी
भारत में यह पहला मामला नहीं है, जब किसी हाई-प्रोफाइल हिट एंड रन केस में ड्राइवर को आगे कर दिया गया हो या बीमारी को ढाल बनाया गया हो। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान से जुड़े चर्चित हिट एंड रन केस से लेकर कई अन्य रसूखदारों के मामलों तक, इतिहास गवाह है कि सबूतों के बावजूद आरोपी कानून के शिकंजे से बचते रहे हैं।
कानूनी जानकारों का मानना है कि अगर सीसीटीवी फुटेज, चश्मदीद गवाहों और फोरेंसिक सबूतों को सही तरीके से अदालत में पेश किया गया, तो ड्राइवर या बीमारी की दलील ज्यादा देर टिक नहीं पाएगी। लेकिन सवाल यही है कि क्या जांच निष्पक्ष और बिना दबाव के हो पाएगी?
अब तक गिरफ्तारी नहीं, जांच के घेरे में शिवम
इस मामले में अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, जो पीड़ितों और आम जनता के गुस्से की सबसे बड़ी वजह है। बंशीधर एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के मालिक केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा को जांच के दायरे में रखा गया है, लेकिन कार्रवाई की रफ्तार पर सवाल उठ रहे हैं।
पीड़ित परिवार इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं, जबकि सोशल मीडिया और सड़कों पर यह चर्चा तेज है कि क्या यह मामला भी रसूख की भेंट चढ़ जाएगा।
कानपुर लैंबॉर्गिनी केस अब एक हादसे से कहीं आगे निकल चुका है। यह मामला तय करेगा कि क्या कानून सभी के लिए बराबर है या फिर पैसा, पहचान और ताकत एक बार फिर न्याय पर भारी पड़ेंगे। आने वाले दिन इस बात का जवाब देंगे कि शिवम मिश्रा पर कानून का शिकंजा कसता है या वह भी पुराने हाई-प्रोफाइल मामलों की तरह बच निकलने में कामयाब हो जाता है।