कानपुर के वीआईपी रोड पर 8 फरवरी को हुए चर्चित लैंबॉर्गिनी केस में पुलिस ने आखिरकार आरोपी शिवम मिश्रा को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर दिया है। यह दुर्घटना तब हुई थी जब लगभग 12 करोड़ रुपये की लैंबॉर्गिनी कार अचानक बेकाबू हो गई और पहले एक ई-रिक्शा को टक्कर मारी, फिर बाइक सवार और एक राहगीर को चपेट में लिया। इसके बाद कार सड़क किनारे लगे खंभे से जा टकराई, जिससे कई लोग घायल हुए और उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।
हादसे के बाद शिवम मिश्रा की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने पांच टीमें लगाई थीं। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, हादसे के समय कार केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा चला रहे थे। हालांकि बचाव पक्ष ने दावा किया कि कार का वास्तविक चालक उनका ड्राइवर मोहन लाल था और हादसे के समय शिवम की तबीयत बिगड़ने से वह चालक पर गिर पड़े, जिससे कार का संतुलन बिगड़ गया। इस घटना का एक वायरल वीडियो भी सामने आया, जिसमें ड्राइविंग सीट पर शिवम मिश्रा को देखा गया, जिससे मामला और भी सुर्खियों में आ गया।
घटना के बाद ग्वालटोली थाने के प्रभारी निरीक्षक को लापरवाही के आरोप में लाइन हाजिर कर दिया गया और वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर से जांच की मॉनिटरिंग शुरू की गई। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने शिवम मिश्रा के घर भी रेड की, लेकिन उस समय घर का दरवाजा नहीं खुला और टीम खाली हाथ लौट गई। पांच दिन की कवायद के बाद आखिरकार आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया।
इस हादसे ने कानपुर में सुरक्षा और सड़क नियमों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के समय घायल हुए लोगों की संख्या और उनकी स्थिति पर अभी तक पुलिस और अस्पताल की ओर से आधिकारिक विवरण जारी किया गया है। इस घटना की जांच अभी भी जारी है और पुलिस पूरे मामले में सावधानी और न्याय सुनिश्चित करने के लिए लगातार कदम उठा रही है।